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1. फिर वही सपना…

SO LET'S START THE STORY: YOU ARE MY SUNSHINE

"चलो नैना उठ जाओ , हमें जाना है। आज तेरी बेटी का नामकरण संस्कार है।" अंजू ने नैना को उठाते हुए कहा।

नैना और अंजू बचपन की best friend है।

दोनों एक दूसरे पर जान देती है। बहुत ही बेमिसाल है दोनों की दोस्ती। एक दूसरे के कहे बिना सब कुछ समझने का हुनर है दोनों।

तभी आहिल आता है रूम में और बोलता है, "नैना, उठो शान आ गया है” और तुम्हें ढूंढ रहा है।

ये सुनते ही नैना झट से उठ गई तो उसे देख अंजू और अहिल जोर से हंस पड़े। अंजू ने कहा," क्या बात है मेरी जां!"

और ये बोल वो उसके सर पर हाथ रख कर बोली, "चल अब जल्दी रेडी हो जा शान आता ही होगा।"

ये सुन नैना ने मुंह बना लिया।

इसके बाद आहिल और अंजू वहां से चले गए।

कुछ ही देर में नैना तैयार होकर नीचे आ गई तो देखा अंजू, आहिल और शान बच्ची के साथ खेल रहे थे।

उसने आते ही कहा, "चलो, पंडित जी ने सारा इंतजाम कर दिया है मंदिर में और मेरी बात भी हो गई है”।

इसके बाद आहिल और अंजू एक कार में बैठ के निकल गए ।

और शान और नैना उसकी छोटी सी दो महीने की बच्ची के साथ दूसरी कार में उनके पीछे चल दिए।

दोनों कारें साथ ही चल रही थी। तभी अचानक से सामने से ट्रक आती देखी तो अहिल ने कहा,"मैं आगे जाता हूं शान तुम कार पीछे कर लो"

शान ने जवाब में कहा , "ओके buddy" और अपनी कार स्लो कर ली।

जैसे ही शान ने कार पीछे कि तभी वो ट्रक तेज़ी से अहिल की कार को धक्का दे कर निकल गया।

ये नज़ारा देख नैना ने जोर से चीखते हुए कहा, अंजू....।

और तभी नैना की नींद खुल जाती हैं सुबह की अलार्म सुनकर।

वो डर से कांप रही थी। जैसे किसी ने उसकी जान ही निकाल ली हो। अपने आस पास देखने लगी।

जब उससे अपने बगल में कोई नहीं दिखा , वो झट से उठ गई और दौड़ते हुए बाहर निकल कर किसी को को ढूंढ़ रही थी।

डर से उसकी हालत ख़राब हो रही थी, जैसे किसी ने उसकी कोई कीमती चीज़ चुरा ली हों।

वो अपने कमरे से नीचे हॉल में आई तो देखा उसकी "परी " अपनी जॉगिंग से अभी वापस ही आई थी और पानी पी रही थी।

नैना दौड़ते हुए आई और उसे कसकर गले लगाकर बोली , " परी, बेटे, आप ठीक होना, आपको चोट तो नहीं आई"।

नैना कांप रही थी बोलते बोलते। परी ने नैना की ओर देख कर कहा, "मम्मा क्या हुआ आप क्यों डर रहे हो इतना ? क्या बात है ,आपने फिर वही सपना देखा?

नैना कुछ नहीं कहती बस उसे हर तरफ़ से check कर रही थी कि कहीं उसे कोई चोट तो नहीं लगी।

तब परी कहती है, "मैं ठीक हूं, मम्मा और आप क्यों इतनी चिंता करती हों।"

तब नैना कहती हैं, "कुछ नहीं हुआ है, वो आपको बेड पर नहीं देखा तो थोड़ा डर गईं बस।"

ये परी सूर्यवंशी है नैना सूर्यवंशी की बेटी। नैना जान छिड़कती हैं अपनी इस पर।

परी पर एक खरोंच भी उसे बर्दाश्त नहीं। अपनी बेटी से नैना सबसे ज्यादा प्यार करती। आज तक परी कोउसने कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होने दी।

परी इस बार 4th स्टैंडर्ड में चली गई है। और आज उसके स्कूल का पहला दिन है। वो एक स्मार्ट और intelligent लड़की हैं।

तभी उन दोनों के पीछे से एक आवाज़ आती हैं। "अरे कोई हमें भी गले लगाएगा, कोई हमें भी थोड़ा प्यार करे।"

ये आवाज़ सुनते ही, परी पीछे मुड़ती हैं और दौड़ते हुए उस इंसान के गले लगा कर कहती हैं, "Daddy आप आ गए, मुझे लगा कि आप नहीं आओगे"

ये कोई और नहीं बल्कि शांतनु मेहरा जो परी के डैडी हैं।

जिसे नैना शान कह कर बुलाती है।

शान मेहरा इंडस्ट्रीज का M.D है।

वो तो अपनी परी को सर आंखों पर रखता है।

उन दोनों को एक दूसरे के साथ मुस्कुराते देख नैना के होठों पे मुस्कान तैर जाती हैं।

ऐसा लम्हा उसके लिए सबसे कीमती होता हैं। इस दुनियां में अगर कुछ उससे सबसे ज्यादा सुकून देता है तो, वो है परी और शान का मुस्कुराता चेहरा।

तभी वन्दना वहां आती हैं और कहती है, "दीदी, आज नाश्ते में कुछ और भी बनाना है तो बताएं क्योंकि अब तो भैया भी आ गए हैं।" नैना ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, "उसके लिए पास्ता बना दो और हां मिर्ची कम डालना।"

वंदना ने नैना की बात पूरी करते हुए कहा, "क्या दीदी इतने सालों में मुझे याद हो गया है की भैया को पास्ते में मिर्च कम पसंद हैं। लेकिन आप ये बोलना कभी नहीं भूलते।"

"चुप कर, बहुत बोलने लगी है। मौका मिला नहीं की शुरू हो जाती हैं। कितनी बार कहा है सुधर जाओ लेकिन, तु है की सुनती नहीं।" नैना ने चिढ़ाते हुए कहा तो वंदना वहां से किचन में नाश्ता बनाने चली गई।

वंदना दीया की nanny है और उस घर की caretaker। वो अनाथ थी, जिसे नैना अपने घर में परी के लिए सालों पहले लाई थी। और तबसे वो उन्हीं के साथ रहती हैं।

उसकी पढ़ाई लिखाई सब नैना ही देखती है। और इस साल उसका graduation पूरा हो जाएगा। वन्दना भी इन सबको ही अपना परिवार मानती हैं।

इधर, दोनों परी और शान की मस्ती चल ही रही थी की वहां नैना आती हैं और कहती है, "ऐसा रहा तो, आज परी स्कूल के लिए लेट हो जाएगी।"

ये सुनते ही परी ने कहा, "नो! मम्मा, आज लेट नहीं हो सकते। आज फर्स्ट डे है। मैं अभी रेडी हो कर आती हूं।"

ये बोल कर उसने शान के साथ hifi किया और दौड़ते हुए ऊपर अपने रूम में रेडी होने चली गई।

परी के जाने के बाद शान नैना के पास आता है और उसके कंधे पे हाथ रख कर उसे सोफे पर बैठ कर खुद उसके सामने बैठ जाते है।

फिर उसका हाथ अपने हाथों में लेकर कहता है, "नैना हम दोनों है ना”, कुछ भी नहीं होगा। आज फिर तुमने वही देखा सपने में, क्यों , है ना?

नैना ने हां में सर हिलाया।

"रिलैक्स। सब ठीक है।"

नैना भीगी आंखें लिए शान की ओर देखती है और बोलती हैं, "कैसे कर लेते हैं शान, कैसे? ?”

“ तुम्हें जानता हूं और पहचानता भी हूं। तुम्हें लगता है कि तुम छुपा सकती हो कुछ मुझसे। हम दोस्त हैं नैना। हमने एक उम्र गुजारी है साथ में।" शान ने कहा तो नैना के होठों पे एक प्यारी सी मुस्कान तैर गई।

सच में, वह दोनों पक्के दोस्त हैं। हमेशा एक दुसरे के लिए बिना किसी उम्मीद के खड़े रहें हैं। यहीं तो दोस्ती होती हैं।

तभी शान ने अपने बालों में हाथ फेरते हुए कहा, "चले जाओ, रेडी हो जाओ, ऑफिस नहीं जाना क्या?" नैना हां में सर हिलाया और वहां से चली गई। शान उसे जाते देख मुस्कुरा रहा था।

थोड़ी ही देर में नैना और परी दोनों ही तैयार हो के डाइनिंग टेबल आकर बैठ गए, जहां शान पहले से उनका इंतज़ार कर रहा था।

वन्दना ने सबकी प्लेट लगाई और सब ने खाना शुरू किया।

शान को पास्ता बहुत पसंद है, इसलिए वो बिना देरी अपना पास्ता खाए जा रहा था।

परी और नैना भी अपना नाश्ता एंजॉय कर रहे थे।

तभी परी ने शान से पूछा ,“डैडी आप इतनी जल्दी कैसे आ गए, आप तो दो दिन बाद आने वाले थे ना।"

शान ने जवाब दिया, "लगता है किसी को मेरा आना पसंद नहीं आया, मैं चला जाता हूं।"

ये बोल शान उठने ही वाला था अपनी जगह से की परी ने उसे रोका और गुस्से से उसे देखा तो शान चुपचाप वापस से बैठ गया।

भाई किसकी मजाल जो प्रिंसेस परी को गुस्सा दिलाए।

नैना शांति से उनकी नोक–झोंक देख मुस्कुरा रही थी, पर उसने कहा कुछ भी नहीं।

परी ने कहा, “आप कितने गंदे हो डैडी, पहले खुद ही कहा नही आ पाऊंगा प्रिंसेस। मेरी बहुत जरूरी मीटिंग है। उसके बाद आज अर्ली मॉर्निंग आ भी गए। और जब मैंने पूछा तो जाना है इनको। मैं नहीं बात करती इनसे,मुझे नहीं जाना आपके साथ। मम्मा, ले चलेंगी मुझे स्कूल।"

शान कहता है ,“मुझे पता है प्रिंसेस मैने ही कहा था, लेकिन मेरी मीटिंग जल्दी खत्म हो गई। इसलिए जल्दी आ गए आपके डैडी आपके पास। ‘आप खुश नहीं हो?’ और मै आपको मिस भी बहुत कर रहा था, इसलिए बिना रेस्ट किए वापस आ गया।”

तभी नैना बोलती है, "बस करो दोनों। परी, मैं जानती थी आपके डैडी आने वाले हैं। कल रात में ही शान ने बताया था और जब इसने कॉल किया था आप सो रहे थे। इसलिए हमने सोचा आपने सुबह में सरप्राइज़ दिया जाय।"

परी ये सब सुनते ही स्माइल करने लगीं और बोली ठीक है, "मम्मा! मैं समझ गई। लेकिन मै तो डैडी के साथ मस्ती कर रही थी।" और फिर वो जोर जोर से हंसने लगी, उसकी खिलखिलाहट भरी हंसी से पूरा घर जैसे चहक सा जाता है।

नैना और शान भी मुस्कुराते। उन्हें दीया को ऐसे बेफिक्र देखना अच्छा लगता था। नैना हमेशा से यही चाहती रही कि उसकी परी ऐसे ही बेफिक्र हो कर रहें।

ये सब देख कर नैना कुछ सोचने लगी तो उसकी आंखों में नमी सी आ गई। तभी शान ने उसके हाथ पे अपना हाथ रख उसे देखा और सब ठीक हैं का इशारा किया।

नैना बस हल्की मुस्कान लिए अपनी पलके झपका ली। शान जानता था की नैना क्या सोच रही होगी इसलिए उसने भी कुछ नहीं कहा और फिर से वे तीनों अपना नाश्ता करने लगे।

तीनों साथ में एक परिवार की तरह नाश्ता किया।

वैसे है भी तीनों परिवार ही तो थे।

तीनों एक दूसरे का हाथ थामे घर से बाहर आ गए।

बहार तीन कारे थी। एक मे वो तीनों बैठ गए। और बाकी दो में उनके गार्डस थे। फिर नैना और शान परी को उसके स्कूल छोड़ने निकल गए।

TO BE CONTINUED…

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