
SO LET'S START THE STORY:— YOU ARE MY SUNSHINE
परी कार में पीछे बैठ कर गाना गुनगुना रही होती और शान और नैना आगे बैठे उसे देख मुस्कुरा रहे होते हैं।
उनकी कार के पीछे दो और कार भी होती हैं, जो उनके साथ चल रही थीं। कुछ ही देर में वो सब स्कूल के सामने आकर रखते हैं।
परी खुश होकर कार से बाहर निकलती हैं और उसके साथ ही नैना और शान भी निकलते हैं।
ये स्कूल सच में काफ़ी बड़ा और अच्छा था। साथ ही यहां की सिक्योरिटी भी काफ़ी टाइट थी। कोई भी अनजान इंसान अंदर नहीं जा सकता था।
नागपुर शहर का ये सबसे अच्छे स्कूलों में से एक थे। वह तीनों अंदर जाते।
परी, आपने दो फ्रेंड्स रवि और अवनी से अपने मम्मी डैडी को मिलवाती। उन्हें बताती हैं कि वो उन दोनों के साथ आज स्कूल के बाद zoo जाएंगे।
नैना कहती है, "ठीक है! पर टाइम पे वापस आ जाना।"
"ओके, मम्मा! " कह कर परी वहां से अपने दोस्तों के साथ असेंबली हॉल की तरफ चली गई।"
नैना वहां तब तक खड़ी रही, जब तक कि परी उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गई।
उसके बाद उसने सौरभ और गौरव को स्कूल में रुकने के लिए कहा और वहां से चली गई।
सौरभ और गौरव दोनों ही परी के स्पेशल बॉडीगार्ड है।
वो दोनों तब से परी के साथ रहते है जब वो तीन साल की थी।
तब से उन्होंने एक पल के लिए भी परी को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने दिया है।
वो दोनों ही परी की बहुत परवाह करते हैं क्योंकि उन्होंने उस छोटी सी बच्ची बड़े होते हुए अपनी आंखों से देखा है। उसकी शरारत और मस्ती को अपनी आंखों से देखा है।
परी को भी उन दोनों से बहुत लगाव था क्योंकि उसके मम्मी डैडी के बाद वहीं दोनों थे, जिससे वो अपनी हर बात मनवाया करती हैं।
परी को और बाकी बच्चों को स्कूल के बाद zoo से safely घर ड्रॉप करने का कह कर शान और अपने बाकी गार्ड के साथ ऑफिस के लिए निकल गए। आज ऑफिस में बहुत जरूरी मीटिंग जो थी।
मेहरा इंडस्ट्रीज की कंपनी बिल्डिंग में।
जल्द ही वहां दो कारे आ कर रुकी। जिसमें दो लोग बाहर आए ।
ये कोई और नहीं बल्कि शांतनु मेहरा और नैना सूर्यवंशी थे।
दोनों अलग अलग कार से बाहर आए थे। इसलिए किसी भी कंपनी में उसके बारे में नहीं पता कि वो दोनों एक दूसरे को जानते हैं | सबने बहुत ही रिस्पेक्ट से उन्हें गुड मॉर्निंग wish किया।
नैना इस कंपनी के legal department की head है। लेकिन ये बात सिर्फ़ higher authorities को ही पाता है।
ऐसे वो डिज़ाइन डिपार्टमेंट की हेड है।
कुछ ही देर में सब मीटिंग रूम में Sky Blessing Apartments Project की डिज़ाइन प्रपोजल पर मीटिंग शुरू हो गई थी। और सब कोई परेशान थे कि मीटिंग रूम में क्योंकि शान को कोई डिजाइन पसंद ही नहीं आ रहा था।
शान ने सारे प्रपोजल को देखने के बाद कहा, "आप सब यही तैयार कर रहे थे एक महीने से। मुझे लगता हैं आप सब को कुछ टाइम के लिए छुट्टी ले लेनी चाहिए।" शान शांत था पर उसका गुस्सा हर कोई भाप सकते थे मीटिंग रूम में।
तभी एक डिजाइनर ने डरते हुए कहा, "सर आपने नैना ma'am की डिज़ाइन नही देखी है। अभी तक जो उन्होंने अकेले ही बनाई है...।"
शान ने उसे घूरते हुए कहा, "अगर सारे डिज़ाइन मिस सूर्यवंशी को ही बनाना है तो आप सब डिज़ाइन डिपार्टमेंट में कर क्या रहे हैं? उनके पास बैकअप प्लान रहता है तो इसका मतलब ये नहीं कि आप सब अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाए।"
इसके बाद शान ने उन सबको एक हफ़्ते का टाईम देकर मीटिंग खत्म कर दी और मीटिंग रूम से बाहर निकल गया।
उसके रूम से बाहर जाते ही सबने राहत की सांस ली। सबका आज डर से हाल बेहाल था। तीन घंटे से चल रही ये मीटिंग उन सब कभी न खत्म होने वाली punishment लग रही थी। अब जा कर उन सब की जान में जान आई थी।
तभी नैना ने कहा कि, "आप सब इस बार डिज़ाइन यूरोपियन और इंडियन स्टाइल को मिक्स करके बनाएं। और हां इस बार आप सब अपना काम ध्यान से करें, गलती की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। आप सबके पास एक हफ्ते का वक्त है।"
“इज थाट क्लियर टू ऑल ऑफ यू।”
इस पे सबने एक साथ येस ma'am कहा।
नैना अपने असिस्टेंट के साथ मीटिंग रूम से बाहर निकल जाती हैं।
कुछ देर बाद नैना के केबिन में...।
नैना का असिस्टेंट राजीव दीक्षित उसके केबिन में आता हैं और बताता है कि उसे M.D Sir (यानी शान) ने डिजाइन प्रपोजल ले कर आपको उनके केबिन में बुलाया है।
इस पे नैना सिर्फ़ हां में सिर हिला कर उसे जाने का इशारा करती हैं। और राजीव वहां से चला जाता है।
कुछ देर बाद।
M.D केबिन के बाहर।
नैना अपने लैपटॉप के साथ केबिन के गेट पर नॉक करती हैं। अंदर से आवाज आती है कम इन, और वो अंदर चली जाती है।
शान के केबिन में..
वहां पर नैना के अलावा भी कुछ और लोग थे। नैना के आने के बाद शान अपने असिस्टेंट से कहता है; “जब तक मैं न कहूं कोई भी अंदर नहीं आना चाहिए, मतलब कोई भी नहीं।”
इसके बाद वो असिस्टेंट वहां से चला जाता है और बाहर से डोर लॉक कर देता है।
अंदर शान, नैना और बाकि सब किसी जरूरी मुद्दे पर बात कर रहे थे। उनकी ये मीटिंग ढाई घंटे तक चली। शान और नैना ने सब से हाथ मिलाया और फिर उनको वापस भेज दिया। जैसे उनके आने के बारे में किसी को पता नहीं चला और ना जाने का।
मीटिंग खत्म होते–होते लंच का भी वक्त भी हो ही गया था। शान ने कहा, “नैना चलो साथ में लंच करते हैं, बहुत दिन हो गए हैं तुम्हारे साथ खाना खाएं और मुझे तुमसे कुछ बातें भी करनी है।”
नैना ने बस हां में सर हिलाया और दोनों वापस शान के केबिन के अंदर चले गए।
शान ने अपने असिस्टेंट से दो लंच ऑर्डर करने और उसके ऑफिस में लाने को कहा।
असिस्टेंट ओके सर कह कर वहां से चला गया।
नैना ने कहा, ‘क्या बात है बोलो शान?’
शान ने कहा, "आज सुबह तुमने वही सपना फिर देखा, है ना? मैं जानना चाहता हूं कि तुम कब तक दीया से झूठ बोलना चाहती हूं।"
"मैं ने उससे क्या झूठ बोला शान?" नैना ने शान की बात बीच में रोकते हुए कहा।
शान ने जवाब दिया, “नैना वो बड़ी हो रही हैं। उसे यहां से भेजना ही होगा कुछ वक्त के लिए। तुम्हें नहीं लगता कि अब तुम्हें उसे बता देना चाहिए कि…”
"बस, शान अब एक और शब्द नहीं। मैं अपनी बेटी को किसी भी कीमत पर इन सब में नहीं पड़ने दूंगी।" नैना ने बिना किसी भाव के कहा तो शान ने कुछ भी जवाब नहीं दिया।
"वो जानता है कि परी, नैना के लिए क्या क्या है? परी के बिना ना रह ही नहीं पाएगी। उसे एक खरोंच भी लगाती हैं तो नैना की जान हलक में आ जाती हैं। फिर भी इस बार उसने सोचा कि एक बार बात करनी चाहिए। आख़िर वो परी का पिता है।"
नैना ने कहा, "वो मेरी जिंदगी है शान। उससे दूर होने के ख्याल से ही, मेरी जान निकलने लगती हैं।"
शान ने जवाब दिया, "तुम्हें क्या लगता है, हां! मैं उससे प्यार नहीं करता। वो मेरी भी बेटी हैं। जान है वो मेरी। मैं बस इतना चाहता हूं कि वो सुरक्षित रहें इसलिए उसे भेजना चाहता हूं। खतरा हर रोज़ पास आता जा रहा है नैना।
नैना ने कहा, "जानती हूं शान, समझती भी हूं। लेकिन यहां वो मेरे आंखों के सामने रहती है तो, मुझे उतनी चिंता नहीं होती।
यह भी जानती हूं की तुमने सारे इंतजाम अच्छे से किए हैं। पर, मै अपने मन को कैसे समझाऊं ! "
इतना बोलते ही नैना चुप हो गई। उसकी आंखें भर आई थी पर उसने अपनी आंखों से आंसू नीचे नहीं गिरने दिए।
ये देख शान उसके पास आया और उसे गले से लगा लिया। वो जानता है कि नैना बहुत मजबूत है पर उसकी एक ही कमजोरी है परी और वो खुद।
वो कभी भी नैना को कमजोर होते नहीं देख सकता था, कभी नहीं। और न ये कोई नैना से बेफिजूल सवाल करें।
यहीं कारण हैं की आज तक कंपनी में भी किसी को नही पता चलने दिया उन दोनों ने की वो एक दूसरे को जानते है। क्योंकि बातें फैलती देर नहीं लगती।
नैना ने सक्त आवाज़ में कहा, "मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है शान, परी और तुम्हारी दोस्ती के अलावा। इन में से एक भी दूर अगर मुझसे हुआ तो, मैं भी नहीं जानती कि मैं क्या कर बैठूंगी।"
अभी शान के केबिन के डोर पे कोई नॉक करता है, नैना तुरंत उससे अलग होती हैं और बाथरूम की तरफ चली जाती हैं। शान सोफे पे बैठ जाता हैं और, कम इन बोलता हैं।
ये शान का असिस्टेंट था, जो लंच का ट्रे ले कर आया था। वो कॉफी टेबल पर लंच रख कर चला जाता है। तभी शान ने सवाल किया , ‘तुम्हें पाता है न कि क्या करना है?’
असिस्टेंट येस सर बोल कर वहां से चला जाता है और दरवाजा बंद कर देता है।
कुछ ही देर में नैना वापस आई और सोफे पे बैठ गई।
"आओ नैना! साथ में खाना खाते हैं। वैसे भी लंच का टाइम हो ही गया।" शान ने उसे देख कर कहा तो नैना मुस्कुरा कर रह गई।
TO BE CONTINUED…


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