
SO LET'S START THE STORY:—YOU ARE MY SUNSHINE
परी के स्कूल कि छुट्टी हो चुकी थी और वो अपने दोनों दोस्तों के साथ बाहर आ रही थी बातें करते हुए।
सौरभ और गौरव दोनों ही स्कूल कैम्पस की पार्किंग में ही बच्चों का इंतज़ार कर रहे थे।
सौरभ और गौरव बातें ही कर रहे थे, की गौरव कि नज़र परी पे पड़ी, जो रवि और अवनी को साथ लिए कार की ही तरफ़ आ रही थी।
तीनों बच्चे उनके पास आए और जल्दी कार में बैठ गए क्योंकि बाहर थोड़ी धूप थी। तीनों को सौरभ ने ठंडे पानी कि बॉटल दी।
गौरव ने ड्राइवर सीट संभाली और पांचों जन zoo जाने के लिए निकल पड़े।
अभी आधे रास्ते ही पहुंचे थे कि सौरभ का फोन पे किसी का कॉल आ रहा था।
फोन देखा तो ये नैना का कॉल था, उसने बिना देरी के फोन उठाया और बोला yes ma'am बोलिए।"
"परी ठीक है? और कहां हों आप सब?" दूसरी तरफ से नैना ने पूछा।
"सब ठीक है नैना माम। परी अवनी, और रवि को मैं और गौरव जू लेकर जा रहे हैं। आधे रास्ते में हैं हम सब।" सौरभ ने जवाब दिया।
इससे पहले कि नैना कुछ कहती, सौरभ ने फिर से कहा, "और हां, इससे पहले कि आप पूछे की बच्चों ने खाना खाया या नहीं? तो मैं बता दूं। बच्चों के साथ मैंने और गौरव ने भी लंच कर लिया है।"
नैना राघव के जवाब पर मुस्कुराई।
बगल में ही शान भी था वो भी हंसने लगा। फोन स्पीकर पे होने से उसने भी सौरभ की बातें सुन ली थी।
" समझ गई कि आप सब ठीक है और लंच कर चुके हैं, तो फिर… "
इससे पहले कि वह आगे कुछ कहती दूसरी तरफ से आवाज़ आई – " अवनी और रवि को ठीक से उनके घर पर ड्रॉप कर देंगे और हमारी छोटी मैडम यानी परी को टाइम से लेकर घर पहुंच जाएंगे माम! " ये आवाज़ इस बार गौरव की थी।
ये सब सुनकर पीछे बैठे बच्चें ज़ोर ज़ोर से हंस पड़े।
उनकी खिल–खिलाती आवाज़ सुनकर। नैना ने कहा, "ठीक है मैं कॉल रखती हूं।"
इधर फोन कटने के बाद शान ने नैना से कहा, "तुम नहीं बदल सकती। अब तो सौरभ और गौरव को भी तुम्हरे सवाल याद हो गए हैं।" और फिर से हंसने लगा।
नैना ने चिढ़ते हुए कहा, "बस करो शान।"
"तुम क्यों इतनी चिंता करती हों। सौरभ और गौरव परी का ध्यान रख लेंगे जैसे वो पिछले बारह साल से रख रहे हैं।" शान ने नैना को समझाते हुए कहा।
तो जवाब में नैना ने सिर्फ़ अपना सिर हिला दिया।
दुसरी तरफ बच्चे जू पहुंच गए थे ।
सौरभ और गौरव साए की तरह उनके साथ।
पूरे रास्ते तीनों बच्चे हंसते, खिल–खिलाते और गाना गुन–गुनाते रहे।
परी को खुश देखकर सौरभ और गौरव के होठों पे मुस्कान तैर गई।
लेकिन दूर कोई था जो चुपके से उन्हें देख रहा था और कुछ समझने की कोशिश में था। बच्चों ने पूरा जू घुमा और हर एक जानवर कि आवाजे निकलने की नाकाम कोशिश करते रहें।
जू से निकलकर वे सब पार्क की ओर चले गए। जू के बगल मे ही एक पार्क था।
वहां पे उन सब ने खूब मस्ती और कई सारे झूले पे झूला झुला।
इस पूरे वक्त सौरभ और गौरव ने तीनों बच्चों को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा।
जब तीनो थक गए तब गौरव ने तीनों को ग्लूकोज पीने के लिए बॉटल दी और कहा – "अब घर चले?"
अवनी ने झट से जवाब दिया, "हां अंकल चलिए।"
रवि ने कहा –"हां अंकल।"
परी ने भी उन दोनों का साथ देते हुए कहा – "मैं बहुत थक गई हूं गौरव अंकल। मम्मा के पास जाना। मुझे बहुत नींद भी आ रही हैं।"
इसके बाद तीनों बच्चों को लेकर सौरभ और गौरव वहां से निकल गए।
पहले उन्होंने अवनी को उसके घर पहुंचाया और फिर रवि को।
शाम का वक्त हो चला था। इसलिए परी कार में ही सो गई थीं।
उसे ऐसे सोता देख सौरभ ने कहा – "देखो गौरव अपनी परी कितनी बडी हों गई है।"
गौरव ने सौरभ की बातो का जवाब देते हुए कहा – "हां! लगत ही नहीं बारह साल हों गए।"
तभी सौरभ ने सामने शीशे में देखा दो काले रंग कि गाड़ी उनका बहुत देर से पीछा कर रही है।
उसने गौरव को बताया और फिर पीछे परी को देखा जो बिना किसी फिक्र के सो रही थीं।
सौरभ ने कहा, "गौरव तुम कार ध्यान से चलाओ तब तक मैं परी के लिए सेफ़्टी स्टैंड लगा देता हूं।" गौरव ने तुरंत हां में सर हिलाया।
सौरभ ने जल्दी से सेफ़्टी स्टैंड ऊपर कि ताकि परी अच्छी तरह सोई रहें।
फिर उसने कार कि कांच ऊपर कि। कांच काले थे इसलिए बाहर से अब कोई भी परी को देख नहीं सकता था।
इसके बाद तुरंत ही शान को फोन लगाया और सारी बातें बता दी।
शान ने उन्हें सावधानी से रहने को कहा ताकि परी को कुछ भी न हो।
सामने वाले को पता न चलने दे की उन्हें पता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है।
सौरभ और गौरव को शान ने उनका GPS लोकेशन भी भेजने को कहा।
तो गौरव ने yes sir कहकर…
उसने कार कि GPS लोकेशन भी तुरंत शान और नैना को भेज दी।
इस वक्त परी की सुरक्षा से ज्यादा ज़रूरी कुछ भी नहीं था।
शान ने बिना देरी के किसीको फोन किया और कहा, "कोई परी की कार का पीछा कर रहा है। उन्हें भटकाना है ताकि सौरभ और गौरव परी को सुरक्षित घर ले कर आ सकें।"
सामने से सिर्फ दो शब्द कहा, “ओके सर।”
"ध्यान रहे! परी सेफली घर पहुंचनी चाहिए। उनका सिर्फ़ ध्यान भटकाना है और कुछ भी नही करना है।" शान ने गंभीरता से कहा।
इधर जल्द ही एक और सफ़ेद कार सौरभ और गौरव के कार के साथ चलने लगीं, जो बिल्कुल उसी कार कि तरह लग रही थी जिसमे परी थी।
दुसरी कार का शीशा नीचे हुए और उसमें से एक आदमी ने सौरभ की ओर देखते हुए कहा, "आप दोनों आगे से बांए मूढ़ जाना। मैं आपको कवर देता हूं।"
ये वही था, जिसे शान ने कॉल किया था।
सौरभ और गौरव ने उसकी ओर देखा सिर्फ़ हां में सर हिलाया।
वहां से बच कर निकलना सबसे ज्यादा ज़रूरी था। जल्द ही दोनों कार ने अपनी रफ़्तार थोड़ी तेज कि।
सौरभ और गौरव कार में सोई हुई परी के साथ आगे थे। उनके ठीक पीछे वो दुसरी कार थी, जो शान ने भेजवाई थी।
जल्द ही वहां से किसी तरह बच कर निकल गए और परी के साथ अच्छी तरह घर पहुंच गए।
इस वक्त रात के 8 बज चुके थे।
दुसरी तरफ अभी भी वो दोनों काली कारे उस दुसरी सफ़ेद कार का पीछा कर रही थी। ड्राइवर सीट पे वो आदमी सोच रहा था कि कैसे उन दोनों गाड़ी से पीछा छुड़ाएं।
सामने उसे हाइवे पर एक ढाबा दिखा, उसे भूख भी लगी थी इसलिए उसने तुरंत ही ढाबे के साइड में कार रोकी और वहां जा कर एक थाली ऑर्डर कि। कुछ ही देर में उसका ऑर्डर आ गया और वो मज़े से अपना खाना खाने में लग गया।
दूर खड़ी काली गाड़ी में …
एक आदमी ने कहा, “ये वो नहीं हैं, जिसका हम पीछा कर रहे थे। वो लोग जा चुके हैं।"
अगले ही पल वो दोनों काली कारे वहां से दुसरी ओर चली गई।
उस आदमी ने जब देखा कि वो दोनों काली कारे वहां से दूर चली गई है, उसने अपना फ़ोन निकाला और शान को फोन लगाया।
जैसे ही शान का फ़ोन बजा, उसने बिना देरी किए उसे कॉल को उठा लिया। दुसरी तरफ से आवाज़ आई, "सर वो लोग चाले गए हैं। मैने कार का नंबर नोट कर लिया है।"
"पता करो कोन थे वो लोग?" शान ने उससे कुछ इंस्ट्रक्शंस दिए और फ़िर फ़ोन रख दिया।
TO BE CONTINUED…


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