
SO LET'S START THE STORY :—YOU ARE MY SUNSHINE
शान के cabin में…
अपने फ़ोन पे शान आज कि तस्वीरे देख रहा था कि उसकी परी कितनी खुश थीं, जो उसे सौरभ ने आज भेजी थी।
आज उसकी बेटी ने कितनी मस्ती की, ये उसके चेहरे से साफ़ पता चले रहा था। वो हौले से मुस्कुरा गया।
नैना भागती हुई आती हैं और शान से कहती हैं, "घर चलो।"
अब तक कंपनी के सारे स्टॉफ अपने अपने घर जा चुके थे। इसलिए नैना सीधे शान के पास आई थी। वो शांत थी। पर शान जानता था, वो अंदर से कितनी घबराई हुई थी।
शान की भी हालत नैना जैसी थी। आख़िर जान बसती हैं दोनों की अपनी बेटी में। बिना कुछ बोले वो नैना के साथ घर के लिए निकल गया।
नैना चुप चाप कार कि खिड़की से बाहर देख रही थी।
उसे आज भी याद है जब सालों पहले उसने एक मां बनना चुना था तब उसने सब कुछ खो दिया था।
सब कुछ खत्म हो गया था उसका।
लेकिन इतना होने पर पर भी उसने अपना हर फर्ज़ निभाया भले ही किसी को कुछ पता नहीं पर शान से कुछ छुपा भी नहीं था।
सब कुछ खोने के बाद उसने परी और शान के साथ अपनी नई दुनियां बनाई।
आज परी उसके वजूद का हिस्सा हैं ही नहीं बल्कि उसके जीने की वजह भी बन गई।
आज किसीने उसकी जिंदगी पे नज़र डाली है, वो कैसे न परेशान होती? कैसे न घबराती?
शान के लिए नैना और परी ही उसका परिवार हैं। इन बीते सालों में वो नैना का साथ पुरी ईमानदारी से निभाता आ रहा है। उसे और अपनी बेटी को उसने कभी अकेला नहीं छोड़ा।
दोनों ने साथ मिलकर अपनी बेटी को बहुत ही लाड–प्यार के साथ बड़ा किया ताकि उसे कभी कोई कमी न हो।
दुनियां से अलग हो कर अपनी नई दुनियां बनाई सिर्फ़ परी के लिए।
पूरे रास्ते दोनों चुप ही रहे।
दोनों अपने ही ख्यालों में मशरूफ थे। पर उनकी खामोशियों ने भी काफ़ी बातें की।
लगभग आधे घंटे में वो दोनों ही घर पहुंच गए थे।
दोनों झट से कार से बाहर आए और अंदर की तरफ़ तेज़ी से बढ़ गए। आज तक इतनी बेचनी दोनों को ही नहीं हुई थी।
दोनों घर के अंदर पहुंचे तो देखा कि परी वन्दना के साथ खेल रही थी।
नैना जल्दी से उसके पास गई और उसे गले से लगा लिया।
शान भी उसके पीछे ही था। उसने दोनों मां बेटी को एक साथ ही गले लगा लिया।
कुछ देर तीनों ऐसे ही खड़े रहें।
परी को कुछ समझ नहीं आ रहा था तो उसने पूछ लिया, "क्या बात है? आप दोनों ने मुझे ऐसे क्यों हग किया।"
शान ने जवाब में कहा, "आपकी मम्मा ने एक बुरा सपना देख लिया था और वो डर गईं।" और उसके माथे पर बड़े ही प्यार से kiss कर दिया।
"मम्मा आप भी न। कितने सपने देखते हों आप।" दीया ने सर पे हाथ रख कर बोली तो नैना ने मुस्कुरा कर बस उसके माथे को चूम लिया।
नैना ने कहा, " परी, बेटे आप जा कर अपना होमवर्क पूरा कर लो। तब तक मैं और आपके डैडी भी फ्रेश हो लेते हैं।"
परी सिर्फ़ हां में सर हिलाया और वहां से अपने रूम में चली गई।
शान ने वंदना को आवाज़ दी तो वो झट से आई और बोली, "जी भईया बोलिए"
शान ने कहा, "तुम परी के पास जाओ और उसके साथ ही रहना। और हां आज के बारे में उसे पता नहीं चलना चाहिए।"
वंदना ने हां में गर्दन हिलाई और परी के पास चली गई।
लिविंग रूम में अब बस शान और नैना ही थे। शान ने नैना का हाथ पकड़ते हुए अपने कमरे की ओर चल दिया।
नैना भी चुप चाप उसके साथ चल दी।
आज जब उन्हें पता चला की कोई उनकी बेटी, उनकी परी की कार का पीछा कर रहा है तो दोनों ही बैचेन हो उठे।
नैना ने सब कुछ छोड़ कर सबसे पहले अपनी टीम को कॉन्टैक्ट किया और परीसेफ रहे ये सुनिश्चित किया।
पूरे वक्त वो इस डर में रही की कही कोई उसकी बेटी को चोट न पहुंचा दे।
शान ने भी अपने तरीके से सिचुएशन हैंडल की।
दोनों कमरे में पहुंचे। शान ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
नैना को उसने बेड पे बैठाया।
वो खुद घुटनें के बल बैठा और नैना का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा, " शांत हो जाओ नैना। सब ठीक है। हमारी बेटी ठीक है।"
नैना कि शांत आंखों में नमी सी तैर गई, "क्यों?, मेरी ही बेटी क्यों? शान वो बच्ची हैं, मासूम हैं। कुछ भी नहीं पता उसे।"
शान ने कहा, "अभी मैं हूं! मेरे रहते हमारी बेटी को कुछ भी नहीं होगा और न मैं तुम्हें कुछ होने दूंगा। समझी।"
"मैंने सब कुछ छोड़ सिर्फ़ अपनी बेटी के लिए। और अगर इस बार कोई भी वापस आया तो देखना शान सबको ख़ाक कर दूंगी।" नैना ने गुस्से में कहा।
शान समझता था नैना की हालत।
आख़िर वो भी तो ऐसा ही महसूस कर रहा था। उन दोनों ने कभी भी, कुछ भी दुनियां के सामने नहीं आने दिया। और इसकी वजह सिर्फ़ और सिर्फ़ परी की सुरक्षा ही तो थी।
शान उठा और नैना के बगल में बैठ गया। नैना ने अपना सर उसके कंधे पे रख दिया और आंखे बंद कर ली। इतने सालों में वो दोनों एक दूसरे को संभालते हुए ही तो परी की परवरिश की।
आज बहुत डर गईं थीं वो।
थोड़ी देर बाद शान ने कहा, "जल्दी ही हमें पता चल जाएगा कि, वो लोग कोन थे। तुम दो तीन दिन कि छुट्टी ले लो और घर पे रहो, परी को भी अच्छा लगेगा।"
"शान वीकेंड पे उनसे मिलने चलोगे! सिर्फ़ हम तीनों। बहुत वक्त हो गया है, मैं, तुम्हारे और परी के साथ कुछ वक्त के लिए उनके मिलने जाना चाहती हूं।" नैना ने कहा।
शान ने जवाब दिया, "ठीक है! हम चलेंगे। मैं तुम्हारी छुट्टी के लिए अप्लाई कर देता हूं। तुम घर पे रेस्ट करोगी और वीकेंड की तैयारी करो। ओके।"
नैना बेड से उठी और खिड़की के पास खड़ी हो गई।
शान ने अलमारी से उसके और अपने कपड़े निकाल कर बेड पे रख दिया। वो नैना के पास आकर बोला, "जाओ फ्रेश हो जाओ, डिनर का भी टाइम हो चला है।"
नैना ने बस हां में सर हिलाया और वाशरूम में चली गई।
आधे घंटे बाद दोनों ही फ्रेश होकर नीचे लिविंग रूम में आए तो देखा कि डाइनिंग टेबल पे परी उनका इंतज़ार कर रही थी।
दोनों आए और परी बगल में बैठ गए।
वंदना किचन से बाहर आई और उसने सबको खाना सर्व करके वहां से चली गई।
वो जानती थी कि आज जो हुआ है उससे नैना परेशान थीं। इसलिए वो वापस लौट गईं।
तीनों डिनर कर रहे थे कि …
दीया ने शान से पूछा, "डैडी हम वीकेंड पर कहां जा रहे हैं? आपने promise था कि इस बार हम कही घूमने जाएंगे।"
शान ने खाना खाते हुए जवाब दिया, “बिल्कुल बेटे! हम जाएंगे और मैने जगह भी सोच ली है।”
ये सुनते ही परी खुश हो गई।
लेकिन इससे पहले कि वह कुछ पूछती शान ने फिर कहा, "लेकिन, मैं अभी आपको कुछ भी नहीं बताने वाला। ये आपके लिए सरप्राइज़ है। और आपको ये वीकेंड पे ही पता चलेगा जब हम वहां पहुंच जाएंगे।"
"परी चलो अपना खाना खाओ। आज कल फिर तुमने रात का खाना स्किप करना शुरू कर दिया है।" नैना ने कहा और उसके प्लेट में एक और रोटी रख दी।
शान ने नैना को देखते हुए कहा, "मैडम, हम भी हैं। थोड़ा हम पर भी ध्यान दे, तो आपकी मेहरबानी होगी।" और मुंह बनाने लगा।
जैसे उसे नैना का खुदको ignore करना पसंद नहीं आया।
ये सुनते ही परी और नैना, शान को देखकर हंसने लगे।
तीनों ने ऐसे ही बातें करते हुए अपना खाना खत्म किया।
ये फैमिली डिनर परी ने खूब एंजॉय किया।
नैना सारे बर्तन वापस किचन में ले गई।
वंदना भी किचन में आई और बोली, "दीदी आप जाओ मैं ये सब कर लूंगी। आप जाकर आराम करिए।"
उसे चिंता हों रही थीं नैना की। इस वजह से वो उसे आराम करने को कह रही थीं।
नैना ने हां में सर हिलाया और वहां से चली गई।
इधर, लिविंग रूम में शान और परी सोफे पे बैठ गए और शान ने परी को एक वॉच देते हुए कहा, "आप हमेशा अपने पास रखना। ओके!"
"ठीक हैं डैडी, मुझे सच मे ये घड़ी बहुत पसंद आई। मैं आपको बोलने भी वाली थीं की मुझे ऐसी घड़ी चहिए पर आपने पहले ही ला दी। थैंक यू डैडी! लव यू।" दीया ने चहकते हुए कहा। और अपने डैडी को hug कर लिया।
वो सच में बहुत खुश थी।
उसे हमेशा बिना मांगे ही उसकी पसंद की चीज़े शान लाकर उसे दे दिया करता था और वो खुश हो जाया करती थी।
आज भी वही हुआ।
कुछ देर बाद…
अपनी नई वॉच से खेलते हुए परी ने शान से पूछा, "डैडी आप बताओं आज क्या हुआ है? मम्मा इतनी परेशान क्यों है?"
शान थोड़ी देर के लिए रुका और परी को देखा और जवाब दिया , "कुछ भी नहीं वो नई प्रोजेक्ट को लेकर परेशान हैं।"
“सच में”, दीया ने फ़िर से कंफर्म करते हुए पूछा। जवाब में शान ने हां में गर्दन हिलाई।
शान ने फिर परी से बहुत प्यार से कहा, "दीया, बेटे आपकी मम्मा कुछ दिनों के लिए छुट्टी पे हैं। वो अगले सोमवार से ऑफिस जाएगी। तो आप उनका ध्यान रखना और स्कूल से सीधा घर आना। अपनी मम्मा को परेशान मत करना"
ये सुनते ही परी तो जैसे झूम उठी। वो बहुत खुश थी की उसकी मम्मा कुछ दिनों के लिए छुट्टी पे हैं।
शान ने फ़िर कहा, "मैंने आपकी मम्मा के लिए भी एक सरप्राइज़ भी सोचा है तो आपको उसके लिए अपनी मम्मा का ध्यान रखना।"
परी ने ओके कहा और फिर अपने रूम में चली गई।
शान उसे जाते हुए देखता रहा।
तभी नैना उसके पास आई और उसके कंधे पर सर रख दिया।
"हम एक फैमिली है। नैना कोई कुछ भी कर ले, मैं हूं ना! तुम्हें कुछ दिनों के लिए रेस्ट करना चाहिए।" उसने नैना की ओर देखते हुए खुद से कहा।
" हां! हम एक फैमली है और हमेशा रहेंगे। मुझे मजबूत होना होगा शान के लिए और परी के लिए। तुम्ही दोनों की वजह से जिंदा हूं। मैं अब नहीं डरूंगी शान।” नैना ने मन में कहा और शान को देखकर मुस्कुरा गई।
कुछ देर वैसे ही दोनों ख़ामोशी से एक दूसरे को महसूस करते रहे। फिर दोनों चुप चाप परी के कमरे की ओर चले गए।
परी का रूम…
दोनों ही परी के आजू बाजू आकर सो गए, ठीक एक परफेक्ट फैमिली थे तीनों।
TO BE CONTINUED…


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