
SO LET'S START THE STORY:— YOU ARE MY SUNSHINE
ये अगले दिन की सुबह थी…
जब परी उठी तो उसने देखा कि उसके मम्मी डैडी उसके दोनों तरफ़ उसे पकड़ कर सोए हुए थे। वो धीरे से उठी और बेड से नीचे उतर गई।
फिर दोनों को चादर ओढ़ कर अपनी जॉगिंग के लिए चली गई।
वंदना ने भी आज जल्दी ब्रेकफास्ट तैयार कर दी थीं।
परी वापस से अपने रूम में तैयार होने गईं तो देखा कि उसके मम्मी डैडी अभी तक सोए थे।
उन्हें बिना परेशान किए वो नैना के रूम में तैयार होने चली गई।
परी तैयार हो कर नीचे आई तो देखा सौरभ और गौरव भी आ गए थे। उसने दोनों को आवाज़ दी - "सौरभ अंकल, गौरव अंकल आइए, मेरे साथ नाश्ता कर लीजिए।"
परी ने मासूमियत से कहा तो दोनों आ गए। फिर परी, सौरभ और गौरव और वंदना, चारों ने साथ मिलकर नाश्ता किया।
सौरभ और गौरव,
दोनों ही नैना के घर के पीछे वाले आउटहाउस में रहते थे।
वैसे वे दोनों अपना खाना खुद बनाते थे लेकिन नैना अक्सर उनके लिए भी नाश्ता और डिनर तैयार करवा कर भेजवा ही दिया करती थी।
इतने सालों में नैना और शान ने उन्हें कभी बॉडीगार्ड्स की तरह नही बल्कि अपने घर के सदस्य की तरह ही समझते आए थे।
ये भी एक कारण था की वे कभी परी को माना नही करते थें। वैसे वे दोनों भी परी को बहुत प्यार और लाड करते थे।
नाश्ता खत्म होते ही वंदना किचन में आई और परी का लंच बॉक्स और,
सौरभ और गौरव का लंच पैक किया। फिर उसे लेकर बाहर आ गई।
उसने सबको को पूरा खत्म करने को भी बोला।
तभी गौरव ने पूछा- "आज नैना माम अभी तक उठी नहीं है ? और शान सर भी जगे नहीं?"
तभी वंदना ने कहा, "वो दीदी और भईया कल की बात को लेकर बहुत परेशान थे और थके हुए भी थे। शायद इसीलिए अभी तक उठे नहीं है।"
तो सौरभ और गौरव ने सर हिलाया। वो दोनों ही समझ गए वंदना किस बारे मे बता कर रही थी।
"मम्मा और डैडी सच में काफ़ी परेशान थे, मम्मा के न्यू प्रोजेक्ट को लेकर। इसलिए तो डैडी ने उन्हें ऑफिस से छुट्टी दे दी कुछ दिनों के लिए। अगले हफ़्ते से वो ऑफिस जाएंगी।"
परी की ये सुनते ही सौरभ समझ गए की क्या बात है।
वंदना ने बात बदलते हुए कहा- "आज सबके लंच बॉक्स पूरे फिनिश होने चहिए नहीं तो पनिशमेंट मिलेगी।"
"खास कर के आप दोनों भाई" , वो सौरभ और गौरव कि तरफ़ देख कर बोली तो परी ज़ोर से हंस पड़ी।
सौरभ ने कहा, "ठीक है! परी चलो स्कूल के लिए लेट हो जाएंगे नहीं तो…"
परी ने हां में सर हिलाया और फ़िर तीनों कर में बैठ गए और स्कूल के लिए निकल गए।
वंदना, जो उन्हें गेट तक छोड़ने गई थी। वो भी घर के अंदर वापस आई तो देखा नैना सीढ़ियों से नीचे आ रही थीं।
उसने वंदना से पूछा, "वंदना, परी।"
इससे पहले कि वह आगे कुछ और कहती, वंदना ने उसकी बात बीच में ही रोकते हुए कहा, " सौरभ और गौरव भैया, परी तीनों ने नाश्ता कर लिया है। और वो दोनों परी को स्कूल लेकर चले गए हैं। "
"तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं वंदना?", वो थोड़ा घबराते हुए बोली।
अचानक किसीने नैना के कंधे पे हाथ रखते हुए कहा, "वो ठीक है, और उसे कुछ भी नहीं होगा।"
ये शान था जो ठीक नैना के पीछे खड़ा था। उसकी बातें सुन कर नैना शांत हों गई।
दोनों ने ही नाश्ता किया और फ़िर शान तैयार होने के लिए अपने कमरे में चला गया।
नैना चुप चाप अपने कमरे में लौट आई।
हां! वो अब कम परेशान थीं तभी उसे एक कॉल आया।
उसने झट से कॉल उठाया कुछ देर बातें कि और फ़िर आराम से खिड़की से बाहर खाली आसमां को देखने लगी।
तभी उसके कमरे के दरवाज़े पे दस्तक हुई।
"आ जाओ !"
"शान तुम्हें कभी भी इजाज़त की ज़रूरत नहीं।" नैना ने बिना देखे ही कहा।
शान आगे आया और उसके बगल में खड़ा हो गया।
दोनों ही आसमां को देख रहे थे।
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद-
शान ने कहा - "मैं ऑफिस जा रहा हूं जल्दी लौट आऊंगा। तुम अपना ध्यान रखना और मैंने तुम्हारी छुट्टी के बारे में परी को बता दिया है तो वो सीधे घर ही आएगी।"
इतना बोल कर शान मूढ़ गया और जानें को हुआ ही था कि नैना ने उसको हाथ पकड़ लिया |
वो पलटी और शान से सिर्फ इतना ही पुछा, "तुम थकते तो नहीं हो ना?"
न में सर हिलाते हुए शान ने जवाब दिया- " सब ठीक हो जाएगा। और मुझे गर कभी थकान हुई तो तुम हों न मेरे लिए बस और कुछ भी नहीं चाहिए मुझे। "
"कॉल आया था, अगले महीने बुलाया है। क्यों?" नैना ने कहा
तब शान ने कहा, "कुछ नहीं होगा। मैंने सिर्फ़ तुमसे इंतज़ार का हक़ मांगा है। बाकी मुझपे छोड़ दो। "
इतना कहकर शान ने नैना को गले लगा लिया तो नैना की आंखों से एक कतरा आंसू बह गए।
वो समझ रही थी कि शान किस बारे में बात कर रहा है। लेकिन उसके पास जवाब नहीं था या वो जवाब देना नहीं चाहती थी शायद।
वो दोनों अलग हुए हुए।
शान ने उसकी आंखों से बहते आंसुओं को साफ़ करते हुए न में सर हिलाते हुए कहा, "तुम सिर्फ़ वीकेंड की तैयारी करो और आराम भी करो। ठीक हैं, मैं जल्दी आता हूं।"
शान ऑफिस चला गया और नैना भी अपने कुछ बचे काम करने लगीं।
मेहरा इंडस्ट्रीज…
ऑफिस में सबको को बता दिया गया था की नैना सूर्यवंशी कुछ दिनों की छुट्टी पे हैं।
उसके डिपार्टमेंट के डिजाइनर को जब पता चला तो सब थोड़े परेशान हो गाए।
तभी शान का असिस्टेंट नीतीश वहां आया।
और कहा की; " आपसब अपने डिज़ाइन प्रपोजल आराम से बनाएं। सर ने कहा है कि उन्हें कुछ ज़रूरी काम है इसलिए आप सबके डिज़ाइन नेक्स्ट वीक की ट्यूजडे को वो देखेंगे। इसलिए आपके पास एक दिन एक्स्ट्रा हैं और तब तक नैना माम भी वापस आ जाएंगी। "
ये सुनते ही सब ने राहत कि सांस ली की उन्हें नैना माम के बिना प्रपोजल नहीं देना होगा।
इसके बाद नीतीश वहां से चला गया।
सब कोई अपने कामों में जुट गए।
दुसरी तरफ सकूल में छुट्टी हो चुकी थी।
सौरभ और गौरव परी को लेकर घर के लिए निकल चुके थे।
आज सब कुछ ठीक रहा। अपनी बेटी को सुरक्षित घर पे देख कर नैना भी सुकुन में थी।
नैना ने शान को भी मैसेज कर के बता दिया था कि परी घर आ गई है।
शान ने रिप्लाई में सिर्फ ओके लिखा।
परी और नैना ने साथ में लंच किया।
और परी ने नैना को हमेशा की तरह सारी बातें बताई।
उसके बाद नैना ने परीको उसके रूम में ले गई, थोड़ी देर के लिए सुला दिया।
शाम होते ही शान जल्दी घर आता और नैना और परी के साथ वक्त बीतता।
तीनों साथ मे खाना खाते।
फ़िर शान दीया को बेड टाइम स्टोरी सुनता और वो बेफिक्र होकर सो जाया करतीं।
नैना अपनी छुट्टी पे थी ।
और अपना वक्त परी के साथ बिताया करती और जब वो स्कूल में रहती तब वो अपना बाकी का समय किताबें पढ़ने में लगाती।
तीन दिनों तक ऐसा ही चलता रहा।
- ये शाम का वक्त था |
शान अपने ऑफिस में कुछ डॉक्यूमेंट्स पढ़ रहा था।
अचानक उसका फ़ोन बजा। उसने नंबर देखा तो तुरंत ही उठाया।
दुसरी तरफ से आवाज़ आई, "तुम लोग आ रहे हो?"
शान ने सीमित शब्दों में जवाब दिया, "हां!"
दुसरी तरफ से आवाज़ आई, "ठीक है! मैं तैयारी करवाता हूं।" इसके बाद कॉल डिस्कनेक्ट हो गया।
शान ने एक राहत कि सांस ली।
वो जानता है कि नैना को ब्रेक की ज़रूरत है। इसलिए वो सारे अरेंजमेंट्स कर चुका था।
सारा काम जल्दी से खत्म कर, वो जल्दी से घर की तरफ़ अपनी कार लेकर चल दिया।
TO BE CONTINUED…


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