
SO LET'S START THE STORY:— YOU ARE MY SUNSHINE
रात का समय…
शान जल्दी ही घर पहुंच गया।
उसने कार पार्किंग में लगाकर वो आउटहाउस की तरफ़ चला गया।
वहां उसने सौरभ और गौरव से परी की सेफ़्टी को लेकर कुछ देर बातें कि और फ़िर वहां से घर आया।
परी हॉल में अपना वंदना के साथ खेल रही थी और नैना किचन में डिनर बना रही थी।
शान को देखकर परी दौड़ते हुए उसके पास गई और शान के गले से लग गई।
शान ने पूछा, "मम्मा, कहां है आपकी?"
जिस पर चहकते हुए जवाब में परी ने कहा- "किचन में डैडी, आज उनके हाथ का शीरा – पुरी, पनीर की सब्जी और मंचूरियन और नान भी मिलेगा डिनर में।"
शान ने हंसते हुए उसके सर पे हाथ रखा और अपना बैग काउच पे रख कर किचन की तरफ़ चला गया।
नैना अपना अप्रोन पहने काम कर रही थी।
वो खाना बनाने में इतनी मशरूफ थी कि, उसे शान के आने का पता भी नहीं चला।
वो चुप चाप उसे किचन के दरवाज़े के पास खड़े देख रहा था।
कितने दिनों बाद आज वो थोड़ी शांत लग रही थीं।
वो मुड़ा और वहां से अपने कमरे की तरफ़ फ्रेश होने चला गया।
तभी नैना पीछे मुड़ी उसने शान को जाते हुए देखा तो हल्के से मुस्कुरा गई।
वो जानती है कि की शान उसकी कितनी परवाह करता है। उसके मन की हर बात, हर वाय्था, हर भाव से वो परिचित हैं।
थोड़ी देर बाद--
शान फ्रेश होकर नीचे हॉल में परी के साथ बातें कर रहा था।
वही वंदना और नैना डायनिंग टेबल पे खाना लगा रहें थे। बीच बीच में नैना, परी और शान की तरफ़ देखती और मुस्कुराती। वो दोनों ही मस्ती कर रहे थे हॉल में।
जब सब अच्छे से हो गया तो नैना भी हाथ मुंह धोकर हॉल में आई।
"चलो दोनों और खाना खा लो नहीं तो ठंडा हो जाएगा। " नैना ने मुस्कुराते हुए कहा -
और फिर वंदना को देखते हुए कहा, " …वंदना जाओ, सौरभ, गौरव और अपने लिए भी खाना लेकर आउटहाउस चली जाओ। तुम सबको भी भूख लगीं होगी। तीनों डिनर करके आराम करना। "
ये सुनते ही वंदना ने हां में सर हिलाया और वहां से किचन में चली गई।
वो जानती थी कि आज नैना अकेले अपनी फैमिली के साथ डिनर करना चाहती थी। ऐसा नहीं है वो समझती नहीं। बस बात ये हैं कि उसे फ़िक़्र होती थी अपने भईया और दीदी की।
इधर, तीनों डायनिंग टेबल पे बैठ गए और नैना ने दोनों को खाना सर्व किया और फ़िर अपने प्लेट में खाना डालने ही वाली थीं कि ?
परी ने उसे रोक दिया और कहा,- "रुको मम्मा! आज मैं और डैडी आपको अपने अपने हाथों से खिलाएंगे। आप अपनी थाली मत लगाओ। "
ये सुनते ही नैना ने शान की तरफ़ देखा और जवाब में वो बस हल्का सा मुस्कुरा दिया।
इसके बाद नैना ने कुछ भी नहीं कहा और उन दोनों के हाथों से खाना खाने लगी।
नैना जानती थी कि दुनियां में चाहें हर कोई उसका साथ छोड़ दें पर ये दोनो हमेशा उसके साथ खड़े होंगे।
और यही उसके लिए सबसे बड़ा सुकुन हैं। जो खाना आधे घंटे में खा सकते थे, वही डिनर पूरे दो घंटे तक चला।
दोनों, शान और परी ने खूब मज़े और खुशी से खाना खाया और और खूब सारी बातें भी की वही नैना भी जवाब देती और दोनों बाप बेटी की मस्ती देख मुस्कुराती रही।
खाना खत्म होने के बाद नैना ने सारे बर्तन किचन में रख दिया और उन्हें धोने को हुई ही थी कि शान ने उसे रोक दिया।
और उससे कहा, " तुम जाओ परी के साथ बैठो ये सब कल सुबह करना। मैं आइसक्रीम ले कर आया। "
नैना ने हां में सर हिलाया और "ठीक हैं " कह कर किचेन से निकल गई।
नैना हॉल में परी के पास बैठ गई।
शान पीछे से आइसक्रीम की ट्रे लेकर आया और सामने टेबल पे रख दिया।
उसने दोनों को एक एक कटोरी दी और एक खुद लेकर परी की दुसरी तरफ बैठ गया।
परी ने आइसक्रीम खाते हुए कहा, " आज कितने टाइम बाद आपने खाना बनाया मम्मा। और मैंने, आपने और डैडी ने मिलकर इतनी मस्ती से खाया। आज का डिनर बहुत टेस्टी था। यम्मी ! "
नैना ने प्यार से उसके माथे को चूमा और कहा - " आपके लिए, आपकी खुशी के लिए मम्मा कुछ भी कर सकती है। बेटे! आप मम्मा की और डैडी की प्रिंसेस हों। "
ये सुन परी ने मुस्कुराने लगी।
" ये आइसक्रीम बहुत अच्छी है डैडी, कल भी ला देना मुझे! " परी ने अपनी प्यारी और मासूम आंखों से शान को देखते हुए कहा।
जवाब में शान ने भी - " ओके कहा " और उसके माथे को चूम लिया।
आइसक्रीम खत्म होते ही नैना किचन में बर्तन साफ़ करने चली गई।
वही हॉल में शान परी को कहानियां सुनाने लगा। थोड़ी देर में परी शान की गोद में सर रख कर सो चुकी थी।
जब तक नैना वापस आई तो देखा दोनों काउच पे पे सो चुके थे। उन्हें ऐसे देख कर उसके चेहरे पे एक प्यारी सी मुसकान तैर गई।नैना ने अपना मोबाइल निकाला और दोनों की एक तस्वीर ले ली और किसको भेज दिया। उसने मेसेज में लिखा— " देखिए दोनों ! "
दुसरी तरफ़ से जवाब आया- "नजर न लगे मेरे बच्चों को"
मेसेज देख नैना मुस्कुरा गई। उसने अपना फ़ोन नीचे टेबल पे रख दिया और धीरे से शान को उठाते हुए कहा, “शान उठो! शान।"
इतने में ही शान उठ गया।
नैना ने उसे इशारे में परी को उसके रूम में ले चलने को कहा। शान ने भी हां में सर हिलाया और परी को आहिस्ते से अपनी गोद में उठाया और ले जाकर उसे उसके कमरे में सुला में सुला दिया।
शान पीछे पलटा ही था कि नैना से टकरा गया। दोनों ने कुछ पल एक दूसरे को देखा और फिर शान रूम से बाहर निकल आया।
अपने रूम की तरफ़ वो बढ़ा ही था कि नैना ने उसका हाथ पीछे से पकड़ लिया और वो अपनी ही जगह पे रुक गया।
शान धीरे से पलटा और नैना ने उसके गले से लग गई। शान ने भी उसे वैसे ही थाम लिया। उससे बेहतर शायद ही कोई समझता था नैना को।
दोनों कुछ देर वैसे ही खड़े रहें।
शान ने फिर उसके माथे पे किस किया और गुड नाईट बोल कर अपने रूम मे सोने चला गया।
नैना भी दीया के के पास आ कर सो गई।
वो दोनों थे ऐसे।
सिर्फ़ परी की खुशी के लिए कुछ भी कर जाते थे। दोनों जान जो बसती थी उसमें।
बहुत ही लाड प्यार से परवरिश की हैं दोनों ने उसकी। उन्हें हमेशा पता रहता था कि कब उनकी बेटी को क्या चाहिए?
शान भी अपने रुम में आ कर खिड़की खोली और हवा को महसूस करना लगा। कुछ देर बाद उसने लाइट बंद की और सोने चला गया।
TO BE CONTINUED…


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