
SO LET'S START THE STORY:— YOU ARE MY SUNSHINE
अगले दिन…
सुबह के सात बजे रहें थे!
जब शान की नींद खुली। वो जल्दी से उठा और नहाने चला गया। और जल्द ही तैयार हो कर नीचे आ गया।
जब शान नीचे आया तो देखा नैना और परी तैयार थे ।
और डाइनिंग टेबल पे ब्रेकफास्ट कर रहें थे। वंदना उन्हें खाना सर्व कर रही थी।
वो भी उनके पास चला आया और एक चेयर पे बैठ गया।
परी खुश होकर बोली- "गुड मॉर्निंग डैडी" आज आप थोड़े लेट हो गए |"
"येस प्रिंसेस" आज आपके डैडी लेट हो गए, वो परी के गाल खींचते हुए बोला।
फ़िर वो नैना की तरफ़ मुढ़ा और बोला, "हम आज शाम को ही निकलेंगे, तो तुम तैयार रहना। मैंने सारे अरेंजमेंट्स कर दिया है तो तुम्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं।"
"ठीक हैं ! पहले मैं परी को स्कूल छोड़ दूं , फ़िर बाकि जो बचा हैं उसे देख लूंगी. "
इससे पहले वो आगे कुछ कहती शान ने उसे बीच में रोकते हुए कहा - " आज मैं अपनी बेटी को स्कूल ड्रॉप करने जाऊंगा।
तुम और वंदना यहां का देख लो और वैसे भी सौरभ और गौरव तो हैं ही।
"क्यों प्रिंसेस ? " शान ने परी सर पे हाथ रखते हुए कहा तो नैना भी मान गई। परी ने भी जोर से सर हिलाया।
परी भी ये सुनकर बहुत खुश थी की आज बहुत दिनों बाद शान फ़िर उसे स्कूल ड्रॉप कर ने जा रहा है।
"येस डैडी ! और रास्ते में आप मुझे चॉकलेट्स भी दिला देना। ओके!" परी खुशी से बोली।
शान ने हां में सर हिलाया और फ़िर तीनों नाश्ता करने लगे।
ब्रेकफास्ट के बाद शान परी को लेकर सकूल के लिए निकल गया और हमेशा की तरह सौरभ और गौरव भी उसके साथ साथ चले गए।
नैना दरवाज़े की तरफ़ उन्हें जाते हुए देखती रही।
अंदर आने के बाद उसने वंदना के साथ दोपहर के खाने के बारे में मेन्यू डिसाइड किया।
नैना ने वंदना से पूछा - "वंदना तुम्हारी एक्जाम की तैयारी कैसी चल रही है?"
"अच्छी चल रही है दीदी, आपको इस बार भी अच्छे नंबर्स लेकर दिखाऊंगी " - वंदना ने जवाब दिया।
नैना उसकी इन बातों से हमेशा मुस्कुराने लगती।
वो जानती थी कि वंदना बहुत मेहनत से पढ़ाई करती हैं।
इतने सालों से वो उनके साथ साथ रह रही थीं बिलकुल एक परिवार की तरह।
वंदना को नैना ने ये सभी महसूस नहीं होने दिया की वो एक अनाथ है ।
और वो सिर्फ़ परी की देख भाल के लिए यहां है। नैना ने खुद आगे हो कर उसे आगे पढ़ने के लिए कहा था।
उसे आज यकीन ही नहीं होता था कि जिस लड़की को वो अपनी परी के लिए अपने घर लेकर आई थीं इतनी बड़ी हो गई थी। लेकिन उसकी कुछ हरकते आज भी बिलकुल बच्चों जैसी थी।
इधर ,
शान ने परी और उसके दोस्तों के लिए चॉकलेट्स दिलाया।
और फिर उसे स्कूल छोड़ने के बाद सौरभ और गौरव को परी का ध्यान रखने का बोल कर ऑफिस के लिए चला गया।
वहां पहुंच कर उसने अपने एसिस्टेंट से कह कर जल्दी ही सबको को इन्फॉर्म करा दिया कि कल यानी शनिवार को ऑफिस सबको छुट्टी दे रही है। और आज तक का सारा काम अपडेट रखना होगा।
वहीं घर पर…
"ठीक हैं ! अच्छा सुन कल मैं, तेरे भैया जी और परी हम तीनों ही वहां जा रहे हैं। तो तुम भी अपनी चीज़े पैक कर लो।" नैना ने वंदना से कहा।
"नहीं दीदी मैं नहीं जाऊंगी इस बार। आप तो जानती हो न मेरे एक्जाम आने वाले हैं और मैं नहीं चाहती की… " इससे पहले वो आगे कुछ कहती नैना ने उसकी बात बीच में काटते हुए सख्ती से कहा, "मैं तुम्हें यहां अकेले छोड़ कर नहीं जानें वाली। चुप चाप अपने बैग पैक कर समझी |"
वंदना अब बिना कुछ बोले अपना सर हिलाया और वहां से चली गई।
वो जानती है कि नैना उसे अकेले कभी नहीं छोड़ सकती।
जितनी वो नैना की इज्ज़त करती हैं उससे कहीं ज्यादा वो वंदना की परवाह करती हैं। उसे कभी ये नही लगने दिया की वो एक अनाथ है और इस घर की नहीं है।
तभी नैना के फोन पर शान का कॉल आया तो उसने झट से उठ कर जवाब दिया, "बोलो शान।"
शान ने दुसरी तरफ से कहा, " तुम तैयार रहना। और हां मैं खुद परी को स्कूल से लेकर घर आऊंगा। ओके!"
नैना ने ओके कह कर कॉल कट कर दिया।
दोपहर हों गई थी--
शान अपने कैबिन में बैठ अपना काम जल्दी जल्दी खत्म कर रहा था।
तभी सामने रखी अलार्म क्लॉक का अलार्म बज उठा।
इसका मतलब था कि परी के स्कूल कि छुट्टी होने में सिर्फ़ एक घंटे बचे हैं।
उसने झट से आख़िर फाइल का काम पूरा किया और अपने असिस्टेंट को बाकि सब कुछ समझा दिया।
फ़िर वो परी को स्कूल से लाने के लिए जानें के लिए निकल गया।
कुछ ही देर में वो स्कूल पहुंच गया। शान को वहां देख कर सौरभ और गौरव तुरंत उसके पास आ गए।
" सर आप यहां, कोई बात है क्या? " सौरभ ने चिंता से पूछा।
इसपर शान ने कहा, " कुछ भी नहीं हुआ है। आप दोनों के होते हुए परी सेफ हैं, ये बात मैं जानता हूं। बस मेरा ही मन हुआ कि आज परी को मैं अपने साथ ही घर लेकर जाऊं।"
सौरभ और गौरव को याद था कि आज शान, परी और नैना के साथ बाहर जाने वाले है। इसीलिए वो भी कुछ आगे नहीं बोले।
कुछ ही देर में परी अपने दो दोस्तों के साथ, उन तीनों को बाहर आती दिखाई दी।
परी ने जब तीनों को देखा तो वो खुश होकर बोली, "रवि, अवनी तुम दोनों जाओ। मेरे डैडी मुझे लेने आए हैं। बाई!" उन दोनों को बाई बोलकर वो झट से शान की तरफ़ भागी।
रवि ने परी को भागते देख कर कहा, "अवनी तुम्हें नहीं लगाता अपनी परी आज कुछ ज्यादा ही खुश हैं।"
अवनी ने जवाब दिया, "हां! वो तो हैं।"
"पर क्यों? वो इतनी खुश क्यूं है? " रवि ने बिना सोचे कहा।
तब अवनी ने उसके सर पे मारते हुए कहा, "बुद्धू ! तुम भूल गए। उसने बताया था ना कि शान अंकल उसे वीकेंड पे कहीं ले जानें वाले हैं।
और देखो आज वो परी को लेने भी आए हैं मतलब वो आज ही निकलने वाले हैं इसलिए वो खुश है। समझे डफर!" और फिर अवनी हंसने लगी।
रवि ने अपना सर सहलाते हुए कहा, "हां –हां मुझे याद है। तुम बस मुझे ऐसे मारा मत करो।"
"ओके! बाई रवि, मेरी मॉम आ गई है। मैं जा रही हूं।" अवनी ये बोल कर चली गई तो रवि भी बाई बोल कर चला गया।
इधर,
शान परी को लेकर भी घर की तरफ़ चल दिया।
उसके कार के पीछे ही सौरभ और गौरव भी कार लिए जा रहे थे।
आधे घंटे में वे सभी घर पहुंच गए।
परी कार से बाहर आई और अंदर चली गई।
सौरभ और गौरव ने दोनों कार गैराज में लगाई और बाहर आए तो देखा शान अभी भी वहीं खड़े थे।
शान ने उन दोनों के पास गया और कहा, "आप दोनों भी लंच के लिए चलिए। फिर थोड़ा रेस्ट करने के बाद हम सब निकलेंगे। और हां! वंदना भी हमारे साथ चल रही है।"
"जी सर! आप चलिए हम दोनों भी फ्रेश होकर आते हैं।" गौरव ने कहा।
शान ने हां में सर हिलाया और फ़िर घर के अंदर चला गया।
उसके जाने के बाद सौरभ और गौरव भी आउट हाउस चले गए।
शान अंदर आया तो देखा कि, परी नैना को शिकायत कर रही थी की उसने उसे नही बताया कि वो सब वीकेंड पे कहां जा रहे हैं?
नैना ने परी को समझाते हुए कहा, " बेटे जब आपके डैडी ने बोला की ये सरप्राइज़ है तो आप बताओं सरप्राइज़ अगर बता दिया जाए तो क्या वो सरप्राइज़ रहता है? बोलो।"
परी ने सोचते हुए कहा, " हम्म्म! हां बताने के बाद तो सरप्राइज़, सरप्राइज़ नहीं रहेगा।"
" तो फिर आप जाओ और जल्दी से फ्रेश हो जाओ फिर हम सब मिलकर खाना खाएंगे। ओके!" नैना ने उसे प्यार से कहा तो वो अपने रुम की तरफ़ भागी।
"अच्छा किया जो तुमने समझा परी नहीं तो पूरे रास्ते बस यहीं पूछा इसने की हम सब जा कहां रहे हैं।" शान ने नैना को देखते हुए कहा।
नैना शान की तरफ़ बढ़ी और उसका कोट लेते हुए बोली, "तुम ठीक तो हो न शान।"
वो देख सकती थी कि शान परेशान हैं। वो कहता नहीं पर नैना समझती थी।
शान ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, " जब तक तुम ठीक हो , हमारी बेटी ठीक हैं, तो फिर मैं भी ठीक हूं।"
नैना ने उसकी बात सुनकर बस सर हिलाया।
फिर नैना ने वंदना से कहा, " तू खाने की तैयारी कर। और एक बार परी को भी देख लेना।"
इतना बोल कर वो शान के तरफ़ पलट गई। वो जानती थी कि शान परेशान क्यूं हैं?, इसलिए उसने ज्यादा कुछ नहीं पूछा और उसे लेकर उसके कमरे में पहुंच गई और दरवाज़ा बंद कर दिया।
वंदना भी उसकी बात सुनकर वहां से चली गई।
इधर ,
कमरे में!
"शान चुप चाप सोफे पे बैठ गया तो नैना उसके पीछे खड़े होकर उसके कंधे पे हाथ रखते हुए बोली, "कितने साल हो गए शान और हर साल में ये तारिक आती हैं तो मन…"
इसे पहले वो अपनी बात पुरी करती, शान ने अपने कंधे से उसका हाथ पकड़ा और उसे आगे कर सामने टेबल पे उसे बैठा दिया।
शान उसका हाथ पकड़े, अपना सर नीचे कर रखा था।
"अब तुम मुझसे छुपाओगे शान" नैना ने कहा।
शान ने अपना सर ऊपर किया तो उसके आंखों में नमी सी थी।
जिसे देख कर नैना के आंखों में भी पानी आ गए।
उसने कहा - " नैना हम दोनों जानते हैं कि सच बदलने वाला नहीं। पर हम दोनों साथ में हैं, हमारी बच्ची के साथ हैं।
मैं परेशान हूं और तुम भी हों। इस तारिक ने हमसे हमारा कितना कुछ छीन लिया। अगर तुम दोनों को भी कुछ… "
नैना ने उसके मुंह पे अपना हाथ रख दिया और उसे कहने से रोका। वो उसे देख कर बोली, " सब ठीक हैं, हमें बस ये याद रखने की जरूरत है की परी इस ट्रिप को लेकर खुश हैं।"
"अगर उसे कभी पता चला तो" शान के आवाज़ में डर था।
नैना ने कुछ देर चुप रहीं और फ़िर कहा, "अभी वो वक्त आया नहीं है। और जब भी ऐसा वक्त आएगा फैसला सिर्फ़ उसका होगा।"
शान ने नम आंखों से उसे देखते हुए कहा, "जानता हूं। पर सच बहुत तकलीफ़ देता हैं"
"हम हैं न साथ में, तो फिर डर किस बात का? नैना ने कहा।
शान नैना की आंखों में भी डर देख सकता था। आख़िर वो दोनों ही एक दूसरे को सबसे ज्यादा समझते थे।
दोनों ने एक दुसरे को गले से लगाया और काफ़ी देर तक वैसे ही बिना कुछ बोले ख़ामोश रहे।
उनकी ख़ामोशी, उनके शब्दों से कहीं ज्यादा बातें करती थी।
और शायद यह वजह काफ़ी थी उनके साथ रहने की।
ऐसा क्या था जिससे शान और नैना डर रहे थे?
TO BE CONTINUED…


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