
SO LET'S START THE STORY:— YOU ARE MY SUNSHINE
कमरे में…
काफ़ी देर तक दोनों एक दूसरे के गले लगे रहे।
"चलो शान फ्रेश होकर नीचे आ जाओ। दीया वेट कर रही होगी।" नैना उससे अलग होते हुए बोली तो शान भी अब नॉर्मल हुआ।
अब तक दोनो संभाल चुके थे।
सालों से दोनों ने ऐसे ही एक दूसरे को संभाला और ख्याल रखा है।
शान ने कहा - "ठीक हैं। " और वाशरूम की ओर चला गया।
नैना भी उठी और अलमारी से उसके लिए कपड़े निकाल कर बेड पे रख दिया।
फिर वो रुम से बाहर निकल आई।
नीचे आ कर देखा तो परी, वंदना, सौरभ और गौरव सब हॉल में बैठे उन दोनों का ही इंतजार कर रहे थे।
परी नैना के पास आ कर पूछती हैं - "मम्मा, डैडी कहां है? "
नैना उसके माथे पर हाथ रखते हुए बोली, "वो आ रहे हैं, आप चलो डायनिंग टेबल पे बैठो। आप सब आइए। "
सब डाइनिंग टेबल पे बैठ गए वंदना सबकी प्लेट लगा रही थी।
दीया सौरभ और गौरव से पजल पूछे जा रही थी।
वंदना ने पूछा - "दीदी, भैया जी की भी प्लेट लगा दूं | "
"हां! भई हमारी भी थाली लगाओ। बहुत जोरो की भूख लगी है। "
पीछे से आवाज़ आई तो सबने पलट कर देखा तो वो शान था।
वो भी आ कर नैना के बगल की खाली जगह पर बैठ गया।
नैना उसे ही देख रही थी तो शान ने उसे इशारे में जवाब दिया की अब वो ठीक है।
तब तक परी ने पूछा - "आप दोनों क्या बातें कर रहे हो? मुझे भी जाननी हैं।
दोनों ने परी की ओर देखते हुए एक साथ कहा, "आपके लिए सरप्राइज हैं" परी ये सुन कर खुश हो गई।
शान ने देखा की वंदना बस सबको खाना सर्व कर रही है तो उसने कहा, " वंदना बैठो और खाओ। अब आगे सब खुद से ले सकते हैं।"
वंदना ने कुछ भी नहीं कहा और चुप चाप बैठ गई और अपने लिए भी खाना सर्व किया।
सब खाना खाने लगे।
शान और नैना भी आराम से खाना खा रहें थे। पूरे टेबल पे बस परी की आवाज़ आ रही थी।
उसने खाते खाते ही सब बताया कि आज स्कूल में क्या हुआ? उसने क्या किया?
सब बस शांति से उसे सुन रहे थे और बीच बीच में वंदना, सौरभ और गौरव भी कुछ कुछ बोल रहे थे परी के जवाब में।
नैना और शान सिर्फ सुन रहे थे और मुस्कुरा रहे थे।
सच था, की वो दोनों परी की खुशी से, उसकी शरारतों को देख कर सबसे ज्यादा खुश होते।
जब बच्चे बड़े होने लगते हैं तो पहले उन्हें सुनना होता हैं और फिर उन्हें बताना और समझाना होता है। और ये बात कुछ ही मां बाप समझ पाते हैं।
आधे घंटे तक सब ऐसे ही परी की बातें सुन कर खाना खाते रहें।
सब ने अपना खाना खत्म किया और हॉल में आ कर बैठ गए।
नैना ने कहा, " परी बेटे आप जाइए और थोड़ी देर आप आराम कर लीजिए।"
"ओके मम्मा ! "
ये बोल कर परी अपने कमरे में चली गई।
वो ऐसी ही थी, एक दम सुलझी हुई।
एक बार मे ही बात मान जाती। वो जितनी समझदार और होशियार थी उठनी ही नटखट और चंचल।
बिलकुल साफ़ दिल था उसका और ये बात उसे कभी कभी बहुत परेशान करती थी।
अब तक वंदना भी किचन से बर्तन साफ़ कर के आ चुकी थी।
वो नैना के बगल में खड़ी हो गई।
शान ने सौरभ और गौरव की ओर देखते हुए कहा - " आप दोनों एक बार सारी सिक्योरिटी देख ले और फिर थोड़ी देर आराम भी कर लीजिए। हम सब 4:30 बजे निकलेंगे। "
उसने फिर वंदना से कहा - " वंदना तुम सारा सामान रखवा दो और तुम भी आराम कर लो। ठीक है। "
वंदना जी भैया बोलकर वहां से सौरभ और गौरव के साथ चली गई।
अब हॉल में सिर्फ़ नैना और शान ही थे।
शान सोफे पे आंख बंद कर सर पीछे टिकाए बैठा था और नैना उसे देख रही थी। वो भी उसके पास गई और उसके कंधे पे अपना सर रख दिया और आंखे बंद कर ली।
"जानता हूं तुम क्या सोच रही हो नैना ? पर हम कुछ नहीं कर सकते। हमें अपने फर्ज़ को निभाना होगा।" शान ने नैना की ओर देखते हुए कहा।
तब नैना ने जवाब दिया, "मैं हर फर्ज़ निभाऊंगी! शान… बस एक बात का डर लगता हैं, कहीं उसे कुछ पता न चल जाए। वो कुछ पूछ न ले।
जानती हूं एक न एक दिन सच बताना ही होगा हमें। लेकिन अभी वो तैयार नहीं हैं इन सब के लिए। और न ही मैं और तुम। "
शान ने जवाब में बस इतना कहा, " जब तक हम साथ हैं, कुछ भी गलत नहीं होगा! अभी शांत हो जाओ। थोड़ी देर पहले तक तो तुम मुझे समझा रही थी न। "
अब नैना ने कुछ भी नहीं कहा। और न ही शान ने।
न जाने क्या डर है दोनों को ऐसे ही कभी नैना डरती तो शान उसे समझाता। और जब कभी शान डरता तो नैना उसे संभालती।
दोनों ऐसे ही कुछ देर तक बैठे रहें पर कुछ कहा नहीं एक दूसरे से। वो दोनो थे ही ऐसे । ज्यादा बोले बिना ही सब कुछ एक दूसरे से कह जाते।
परी के साथ वंदना थी उसके कमरे में इसलिए शान और नैना, शान के कमरे में चले गए।
शान के कमरे में…
कमरे में आते ही शान ने अपने बेड को दो भागों में अलग किया।
एक पे नैना लेट गई और दुसरे पे शान। दोनों की आंखें बंद थीं पर सोया कोई भी नहीं था।
शाम के चार बज रहे थे--
हर कोई तैयार हो कर हॉल में खड़े परी का इंतज़ार कर रहे थे।
नैना ने कहा- " शान परी आज कुछ ज्यादा देर नहीं कर रहीं ? "
"तुम पूछ रही हो या बता रही हो।" ये बात शान ने पानी पीते हुए कहा।
नैना ने शान की बातों को अनदेखा कर परी को आवाज़ लगाई, "परी, परी, प…!"
वो आवाज़ दे ही रही थीं की तभी परी नीचे आते हुए बोली, " क्या मम्मा ? कितने आवाज़ देते हो आप। मैं रुम में ही तो थी और रेडी हो रही थी।"
उसकी आवाज़ सुनकर सभी उसे देखने लगे। उसने खुद को बहुत अच्छे से तैयार किया था।
"ओके ! माय लिटिल प्रिंसेस। आप तो बहुत सुंदर लग रही हैं। लगाता है आप अपने बाल बनाने बहुत ज्यादा वक्त लिया है इसलिए ये बिलकुल अच्छी तरह से बन में हैं।" नैना ने मुस्कुराते हुए दीया से कहा।
"येस मम्मा ! मुझसे ये "बन" बन ही नहीं रहा था। फ़िर भी मैंने बना लिया लास्ट में।" परी ने अपनी बालों का जुड़ा दिखाते हुए बोली।
तभी शान सामने आया और उसने कहा- " आज तो मेरी प्रिंसेस बहुत ब्यूटीफुल लग रही है। लेकिन अब हमें चलना चाहिए, नहीं तो हम सब लेट हो जाएंगे। ओके!"
सारा सामान पहले ही कार में रखवा दिया गया था नैना ने इसलिए किसको कोई भी चिंता नहीं थी।
सभी घर से बाहर आए।
नैना, शान और परी एक कार में बैठ गए।
और दुसरी कार में वंदना, सौरभ और गौरव थे।
निकलने से पहले एक शान ने सिक्योरिटी देख ली थी। शान कार ड्राइव कर रहा था, पैसेंजर सीट पे नैना थी और बैक सीट पे परी बैठी थी। वो अपनी डॉल साथ खेल रही थी।
दूसरी कार में -
जो ठीक शान के कार के पीछे चल रही थी -
वंदना पीछे बैठे कर अपनी पढ़ाई कर रही थी। सौरभ और गौरव भी चुप चाप ड्राइव कर रहे थे।
शान की कार में…
नैना ने परी को हेड फोन देते हुए कहा, " परी बेटे, ये लो और आप गाने सुनो। आपको पसंद हैं न। "
"मम्मा आपने ये headphones कब ली। आपको पता था, मुझे ये चाहिए। थैंक्यू मम्मा!" परी ने एक्साइटेड होते हुए पूछा और तुरंत हेडफोन ले लिया।
शान ने कहा, " कैसा लगा ये सरप्राइज़ परी। वैसे भी आपकी मम्मा को सब पता रहता है।" ये बात कहते हुए उसने नैना की तरफ़ देखा।
नैना ने उन दोनों की तरफ़ देखा और मुस्कुराने लगी पर कहा कुछ नहीं।
वो चुप चाप खिड़की के बाहर देखने लगी। परी ने भी जल्दी से हेडफोन अपने कान पर लगाया और म्यूजिक प्लेयर ऑन कर दिया। वो बहुत खुश थी।
शान नैना की ख़ामोशी समझता था इसलिए उसने भी आगे कुछ कहना ठीक नहीं समझा।
वो जानता था कि परी की खुशी उसके लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है और उसका कुछ बातों से दूर रहना उससे भी ज्यादा ज़रूरी।
वहीं दूसरी ओर…
वंदना, सौरभ और गौरव तीनों इस बात से परेशान थे कि कहीं परी को पता न चल जाए क्योंकि सौरभ ने उसकी फेवरेट कॉफी मग तोड़ दी।
गौरव ड्राइव करते हुए बोला, " तुम्हें क्या ज़रूरत थी उस मग को वंदना से छीन ने की। अब भुगतना।"
वंदना ने कहा, "हां! गौरव भैया। अब देखना सौरभ भैया क्या होता हैं?" वो अपनी हंसी दबाते हुए बोल गई।
"आपको हमेशा बच्चों वाली चीज़े क्यों पसंद आती हैं ? ये बात तो मैं आज तक नहीं समझी।" वो फिर सौरभ को देख कर बोली।
" सिर्फ़ तुम्हें ही नहीं वंदना मुझे भी इसकी ये हरकत आज तक समझ नहीं आई? " गौरव ने सौरभ की खिली उड़ाते हुए कहा।
इस पर सौरभ चिढ़ गया तो वन्दना हंसने लगी।
सौरभ जानता था की आज तो परी उसे छोड़ने वाली नही। इसलिए वो चुप चाप आंखे बंद कर अपनी सीट से ठिक गया।
इधर,
शान की कार में…
परी भी खूब मस्ती से गाने सुन रही थीं। उसे ऐसे देख नैना और शान, दोनों ही मुस्कुराने लगे।
"शान कल की सारी तैयारियां हो गई है? "
नैना ने उस बिना देखे ही पुछा तो शान समझ गया कि वो परी की नज़रों से बच रही है।
"हां! सब कुछ हो गया है। मैंने उन्हें भी बता दिया है।" शान ने जवाब दिया।
नैना ने ओके के अलावा और कुछ भी नहीं कहा और फिर से खिड़की से बाहर झांकने लगी और अपनी अपनी आंखें बंद कर ली।
तीन घंटे से लगातार ड्राइविंग करने के बाद …
शान ने एक सेफ जगह देख कर कार रोकी। उसने देखा तो नैना और परी दोनों ही सोए हुए थे।
पर कार रुकने से नैना की आंखें खुल गईं।
उसके पीछे गौरव ने भी कार रोकी।
अंदर वंदना सोई थी पर सौरभ नहीं।
सौरभ ने कहा, " तू यहीं रुक मैं देखता हूं।"
राशिद ने हां में गर्दन हिलाई।
सौरभ कार से बाहर आया और शान की कार के पास आ गया।
उसने पूछा, " क्या हुआ सर? कोई बात है ?
नैना ने भी पूछा, " क्या हुआ शान, सब ठीक हैं न?"
नैना और सौरभ को ऐसे परेशान देख शान ने कहा, "कुछ नहीं हुआ है। बॉटल में पानी खत्म हो गई है। सौरभ आप पानी की बॉटल ला दीजिए।"
ये सुन सौरभ और नैना दोनों ने ही राहत भरी।
सौरभ ने हां में सर हिलाया और बॉटल लेने अपनी कार की तरफ़ चला गया।
नैना ने शान को देखते हुए कहा, "तुम ठीक हों न शान।" शान ने जवाब में सिर्फ़ उसकी तरफ़ मुस्कुराते हुए देखा पर कहा कुछ भी नहीं।
सौरभ जल्दी ही दो बॉटल पानी लेकर आया और शान को देते हुए कहा, " सर ! रात हो गई है। अब हम सब सीधा मेंशन में ही रुके तो अच्छा होगा।"
शान ने भी जवाब दिया, "ऐसा ही होगा सौरभ। आप अपना और सबका ध्यान रखिए।" इतना बोल उसने पानी पिया और फिर कार स्टार्ट कर दिया।
फिर सौरभ वापस लौट कर कार की ड्राइविंग सीट कि तरफ़ का दरवाज़ा खोल कर बोला, " गौरव अब मैं ड्राइव करता हूं, तुम रेस्ट कर लो।"
गौरव ने सहमती मे सर हिलाया और दोनो ने जगह बदल ली। और अब कार सौरभ ड्राइव कर रहा था।
वंदना अभी भी सोई थी।
शान आगे चल रहा था और उसके पीछे सौरभ ड्राइव कर रहा था। वापस से दोनों कार सड़क पे दौड़ने लगी।
TO BE CONTINUED…


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