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आरंभ:- आपको मेरी बिल्कुल भी परवाह नहीं!

कुल्लू…

भारत वो पहाड़ी इलाका जहां लैंडस्लाइड आम तौर पर होती रहती है। आज फिर वहां फिर तेज़ बारिश की वजह से मौसम ख़राब हुआ पड़ा था। 

सभी जगह अलर्ट जारी कर दिया गया था कि कोई भी घर से बाहर न जाएं जो जहां हैं वहीं रहें। 

लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। सड़कों पर यातायात अपनी अपनी जगह पर रोक बंद थे। जाम की स्थिति होके भी न थी। 

वहीं पहाड़ी के मंदिर की दूसरी तरफ एक कार अचानक बंद पड़ गई। उसमें एक एक आदमी और अपनी प्रेग्नेंट पत्नी के साथ साथ था। 

देखकर लग रहा था जैसे की वो अपने प्रेग्नेंसी के लास्ट फैज़ से गुज़र रही थी। एक अलग चमक उनके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। 

ये हैं रेहाना सिंह। और उनके साथ उनके पति राजवीर सिंह। 

दोनों ही आज कुलदेवी के दर्शन के लिए यहां आए थे। लेकिन खराब मौसम और गाड़ी ख़राब होने के कारण उनकी कार बंद पड़ गई थी। 

राजवीर बोले, “ राही आप यहीं अंदर बैठिए हम देखते हैं क्या हुआ है। ”

“ वीर आप भी यहीं रहिए देख नहीं रहे मौसम कितना ख़राब हुआ जा रहा है। इतनी बारिश और तूफान में क्या ही देख पाएंगे आप। ” रेहाना बोलीं। 

तो राजवीर उनके गालों को हाथों में थाम माथे को चूमते हुए बोले, “ राही अगर मातारानी ने हमें यहां तक पहुंचाया है तो आगे भी वही पार लगा देंगी। आप क्यों इतनी परेशान होती हैं। वैसे भी डॉक्टर ने पंद्रह दिन बाद की डेट दी है डिलीवरी की। आपको बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लेना है। अब आप आख़िरी समय में खुदको परेशान कर क्यों हमारे बच्चों को परेश करना चाहती हैं। ” 

ये सुनकर रेहाना की भौहें चढ़ गई।

वो बोलीं, “ हां?? मतलब मैं कुछ हूं ही नहीं? जो हैं आपके बच्चें ही हैं? ” ये उनका सवाल कम ताना ज्यादा लग रहा था।

रेहाना को ये बिल्कुल भी पसंद नहीं की उनके पति उनके अलावा किसी और की ज़रा सी भी परवाह करें। वो अक्सर इस बात पर चिढ़ जाती और रूठ जाती। उनके नाराज़ होने के बाद राजवीर उन्हें मनाते।

और ये पिछले नौ महीनों से चल रहा था। लेकिन राजवीर बड़े ही धीराज के साथ उनके साथ व्यवहार करते और बड़े प्यार से अपनी रूठी नाराज़ पत्नी को मनाते। 

जिस समझ राजवीर ने एक आह भरी और धीरे से कहा, “ फिर से मूड स्विंग। बचालो मातारानी। ” 

और फिर रेहाना का हाथ थामे बड़े ही धीराज से बोले, “मैंने ऐसा कब कहा? आप बातों को घुमाना बंद करें। आप जानती हैं आप कितनी मायने रखती हैं इस राजवीर सिंह के लिए। जान हैं आप मेरी। ”

इस पर रेहाना मुंह बनते हुए बोलीं, “ नहीं , नहीं जानती मैं कुछ। और मैं नहीं आप घुमा रहे हैं बातों को। सच तो ये है कि आपको मेरी बिल्कुल भी परवाह नहीं। आपको बस अपने बच्चों की परवाह है। ” कहते हुए अपना मुंह दूसरी तरफ कर लिया। 

तो राजवीर ने अपनी ही हथेली अपने ही सर पे दे मारी। वो अलग बात थी कि ज़ोर से नहीं किया वरना महाभारत तय थी। 

फिर वो बड़े प्यार से उन्हें समझाते हुए मनाने की कोशिश करते हुए बोले, “अरे ये क्या बात हुई आप तो बिना बात के ही नाराज़ हो गई। … कहते हुए राजवीर ने रेहाना के चेहरे को अपनी तरफ़ किया। अभी वो आगे कुछ

कहते कि की तभी ज़ोर से बिजली कड़की। 

To be continued…

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