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अपने मियां मिट्ठू बनना!

जैसे ही बिजली कड़की रेहाना झट से राजवीर के गले जा लगी।

उन्हें बिजली कड़कने की आवाज़ सेें डर लगता है इसलिए वो उनके सीने में जा छिपी। उनकी इस हरक़त पर राजवीर मुस्कुरा कर रह गए।

वो उन्हें अपने आलिंगन में लेते हुए बोले, “ अभी तो कोई बहुत नाराज़ था। ”

“वीर आप।” कहते हुए वो उनके सीने पर धीरे से मारती हैं।

उनकी इस हरक़त पर राजवीर हंसने लगे और उनके सर को चूमते हुए बोले, “ राही चलिए। शाम होने को आई है। अगर यहां से अभी पैदल निकले तो अंधेरा होने से पहले हम मंदिर में होंगे। वहां आप और बच्चे दोनों ही सुरक्षित भी रहेंगे। और जैसा मौसम है हमें नहीं लगता हम आज वापस लौट सकेंगे। यहां नेटवर्क भी नहीं है। ”

“ आप साहिल कह रहे हैं। इससे पहले कि मौसम और खराब हो। हमें निकलना चाहिए। लेकिन ये बारिश ? ” रेहाना ने अपनी चिंता जताई।

“ आपकी छतरी कब काम आएगी मैडम। ” कहते हुए राजवीर उनकी पर्स में से एक छाता निकालकर उन्हें दिखाते हैं।

ये देख वो उन्हें घूरते हुए सवाल करती है।

“ और मैं जो चल नहीं सकूंगी। उसका क्या? ”

“ आप क्यों फ़िक्र करतीं हैं। ये बंदा हैं न। आपको आपकी मंज़िल तक पहुंचाने के लिए। ” कहते हुए राजवीर ने उनके गालों को चूम लिया। तो वो आवक सी रह गई।

और फिर आगे बोले, “ आप छतरी संभाल लीजिए आपको हम संभाल लेंगे। ”

“ वीर आप दिन पे दिन बहुत ही प्यारे होते जा रहे हैं। ” रेहाना ने एक बड़ी प्यारी मुस्कान के साथ उन्हें देखते हुए कहा।

तो राजवीर ने अपने बालों में हाथ फेरते हुए कहा, “ हाय ! ये भी कोई कहने की बात है। ये वीर तो अपनी राही के प्यार से बावरा हो रहा है और आप सिर्फ़ प्यारे होने की बात कर रहीं हैं। ये तो सरासर गलता है। नाइंसाफी है भई मेरे साथ। ”

राजवीर की इन नौटंकी को देख वो हंसने लगी।

“ क्या वीर आप भी न। अपने मियां मिट्ठू बनना आप कभी नहीं भूलते न। ”

अभी वो बोली ही थी कि राजवीर ने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया। रेहाना ने छाते को अच्छे से पकड़ लिया।

फिर वो मुस्कुरा के बोले, “ अब क्या करें मैडम। मेरी पत्नी तो मेरी तारीफ़ करती नहीं। सोचा खुद ही कभी कभी कर लिया करूं। ”

रेहाना ने ये सुन न में सर हिलाया और मुस्कुराई।

“ अब चले। ”

“ जो हुक्कुम मेरे आका। ” कहते हुए राजवीर उन्हें लिए मंदिर के कच्चे रास्ते पर चल दिए।

____

इधर दिल्ली में…

ठाकुर विला।

ये विला अशोक ठाकुर का है जिसे उन्होंने ने अपन इकलौती बेटी सोनारिका ठाकुर के नाम कर दिया। ये उनकी शादी का उपहार था उनके पिता के तरफ़ से।

सोनारिका की शादी संजीव कपूर आठ साल पहले हुई थी। दोनों ही कॉलेज के दिनों से एक दूसरे को जानते थे लेकिन उनकी शादी एक अरेंज मैरिज थी।

उनकी शादी को पूरे आठ साल हो चुके थे। उनका एक पांच साल के बेटा भी है।

हॉल में…

अशोक ठाकुर अख़बार पढ़ते हुए अपनी चाय पी रहे थे। तभी एक बॉल उनके पैर को आके लगा।

तो वो अख़बार और अपनी चाय एक तरफ़ रख कर बोले, “ अरे कोई है? ” वो बॉल उठते हुए कहते हैं।

“ नहीं कोई नहीं है। ” उन्हें एक प्यारी सी आवाज़ सुनाई देती है जो बेशक़ सोफे के पीछे से आ रही थी लेकिन। उन्होंने पलट कर देखा नहीं।

वो बॉल उठाते हुए फिर बोले, “ तो फिर अब मुझे अकेले फुटबॉल खेलना होगा। कोई बात नहीं। मैं अकेले ही खेलूंगा और जीतूंगा भी। ”

ये कहते हुए वो अपने तिरछी नज़रों से सोफे के पीछे देखते हैं।

तो देखते हैं कि दो मासूम आंखें उन्हें देख रही थी। जिस देख वो मुस्कुराए।

फिर बॉल से हल्के हाथों से खेलते हुए बोले, “ रामदीन चलो मेरे गार्डन में। आज मैं और तुम खेलेंगे। ”

तभी किसीने जोर से चिल्लाते हुए कहा, “ नो! ”

“ नानू बड्डी आप रामदीन के साथ नहीं खेल सकते। ” कहते हुए एक पांच साल का लड़का उनके सामने आ खड़ा हुआ।

वो अपने कमर पर दोनों हाथ रख गुस्से से अपने नानू बड्डी ( अशोक ठाकुर ) को देख रहा था।

रामदीन भी वहीं खड़े उन दोनों को देख मुस्कुरा रहा था।

“ साहब भी न छोटे बाबा के साथ बिल्कुल बच्चे ही बन जाते है।

और छोटी मालकिन को दोनों ही परेशान कर जाने कौन सा सुख पाते हैं।

आज भी ये दोनों कुछ न कुछ करके ही मानेंगे। हे प्रभु बचा लेना अपने रामदीन को। ”

कहते हुए रामदीन ने एक आह भरी। और उस बच्चे को देखने लगा जो गुस्से से

अभी भी अपने नानू बड्डी को देख रहा था।

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