
ठाकुर विला
आधे घंटे बाद…
अशोक जी अंशु के साथ तैयार हो के नीचे आए और नाश्ता करने के लिए अपनी अपनी कुर्सी पर बैठ गए।
सुलोचना काकी अशोक जी बोले, “ सुलोचना नाश्ता लगवाओ जल्दी पेट चूहे हाथी सब के सब रेस कर रहे हैं। ”
“ यस! डी एम जल्दी कलो। नहीं लो सब बाहर आ जाएंगे।” अंशु ने जल्दी से कहा।
“ बिल्कुल छोटे बाबा अभी सुलोचना आपके लिए यम यम लेकर आई। ” सुलोचना काकी मुस्कुराई और इतना कहते हुए वापस किचेन में खाना लेने चली गई।
थोड़ी देर में सुलोचना काकी ने मेड की मदद से टेबल पे नाश्ता लगा दिया।
नाश्ता देखकर अशोक जी और अंशु के मुंह में तो जैसे पानी ही आ गया।
अशोक जी ने जल्दी से अपनी और अंशु की प्लेट लगाई।
पूरी थोड़ी और उसमें सब्जी डाल जैसे ही पहला कौर खाया उनकी आंखें नम हो गई।
उन्होंने ने सुलोचना काकी को देखा तो वो मुस्कुराते हुए उन्हें देख हां में सर हिला देती है।
के तभी कोई उनकी आंखों को पीछे से अपनी हथेली से बंद कर देता है। अशोक जी के आंखों से आंसुओं का हर कतरा बेघर हो बहने लगा।
अंशु जो अपने नानू बड्डी के खिलाने का इंतज़ार कर रहा था। जब उसने उन्हें रोते देखा तो अचानक ही गुस्से से लाल हो गया।
वो अपनी कुर्सी से उठा और किसी को ज़ोर से धक्का दे देता।
“ मेरे बड्डी नानु से दुर रहो। ”
अंशु जोर से चीखा।
तब अशोक जी होश आया और वो अंशु को पकड़ते हुए बोले, “ अंशु रुको बड्डी। ”
“ नहीं। इन्होंने आपको रूलाया नानु बड्डी। मैं इन्हें नहीं छोडुंगा । ” अंशु छटपटाते हुए बोला और अपने हाथ पैर चलाने लगा ।
तो अशोक जी जल्दी से बोले, “ नहीं अंशु।” लेकिन अंशु तो जैसे कुछ सुनने को तैयार ही नहीं था।
आख़िर में अशोक जी ने तेज़ आवाज़ में कहा, “ बस बहुत हुआ अनुराग। ”
ये सुनकर अंशु अचानक शांत हो गया। और अपने सामने खड़े राजवीर को देखने लगा।
जी हां यही है अनुराग कपूर। हमारी कहानी का हीरो। अंशु ही अनुराग कपूर है। सोनारिका ठाकुर यानि मिसेज कपूर और संजीव कपूर का बेटा।
और फिर भागते अपने कमरे में चला गया।
उसके जाने के बाद अशोक जी को एहसास हुआ कि उन्होंने पहली बार उससे तेज़ आवाज़ में बात। वो भी उस बच्चे से जो उनकी दुनियां है।
अब उन्हें खुद गिल्टी फील हो रहा था कि क्यों वो उस बच्चे पर चिल्लाए। वो तो राजवीर को जानता भी नहीं लेकिन उन्हें तो पता है न कि अंशु उनके लिए कितना प्रोटेक्टिव है।
वो छोटा सा पांच साल का बच्चा भले ही बच्चा था लेकिन समझता सब था।
“ ये क्या हो गया मुझसे? उसने खाना भी नहीं खाया है। उसे तो बहुत भूख लगी थी। अब न जाने कितनी देर तक नाराज़ रहेगा। ”
कहते हुए वो खुद में ही परेशान होने लगे और उसके पीछे जाने को ही हुए ही थे कि राजवीर ने उन्हें आवाज दी।
“ पापा... ”
अशोक जी के कदम रुक गए। लेकिन वो पीछे नहीं पलटे।
अब जा के उन्हें याद आया कि उनके अलावा कोई और भी वहां मौजूद है।
“ क्या हुआ पापा? देखोगे नहीं अपने सोनू को? ”
लेकिन फिर भी वो पीछे पलट कर राजवीर को नहीं देखते। पर उन्होंने अपने हाथों मुठ्ठी बना ली। जैसे वो खुद को रोक रहे हो।
ये देख राजवीर की आंखें गीली हो गई।
फिर भी राजवीर ने एक आखिरी कोशिश करते हुए अशोक जी को बुलाया।
“ आई एम सौरी पापा। ”
राजवीर ने अपनी रूंधी आवाज में कहा तो पलटकर राजवीर को अपनी भीगी आँखों से देखते हुए अपनी बाहें फैला कर अपने पास आने का इशारा किया तो —
ये देख राजवीर भागते हुए उनके गले जा लगा। और एक छोटे बच्चों की तरह रोने लगा।
और एक ही बात बार बार बोलने लगा।
“ आई एम सौरी पापा। आई एम सौरी पापा। ”
“ माफ़ कर दीजिए पापा अपने सोनू को। जो किसी गैर की बातों में आकर आपको गलत समझ मैंने।”
“ आई एम सौरी पापा। ”
अशोक जी कुछ न बोले बस उसकी पीठ सहलाते हुए उसे शांत करने की कोशिश करते रहे।
थोड़ी देर बाद जब राजवीर कुछ शांत हुआ तब अशोक जी एक दम शांत लहज़े में कहते हैं।
“ न मेरे बच्चे। शांत हो जाओ। ”
“ सब कुछ ठीक है। कुछ भी नहीं हुआ। तुम लौट आए यही मेरे लिए काफ़ी है। ”
तो राजवीर उनकी बात पर कहता है।
“ नो पापा। नो। ”
अशोक जी उसे देखते रह गए।
“ गलती मेरी थी। और सजा आपने और उसने काटी। ”
उसकी बार बार एक ही रट सुनकर अशोक जी तेज़ आवाज़ में थोड़े गुस्से से बोले —
“ कोई गलती नही की मेरे बेटे ने। सुना तूने। कोई भी गलती नहीं थी मेरे बेटे की।
खबरदार जो मेरे बेटे को गलत कहा तो। और तुम माफ़ी क्यों मांग रहे हो ? गलती तुम्हारी नहीं थी बच्चे। गलती मेरी थी जो एक बिच्छू पर विश्वास कर बैठा। ये भूल गया कि बिच्छू का स्वभाव ही होता है डंक मारना।
लेकिन मुझे अब कोई मलाल नहीं। मेरा बेटा लौट आया है। मेरे लिए काफ़ी है इतना। ” कहते हुए वो राजवीर को समझाते हैं और उसके ललाट को चूम लेते हैं।
अपने पापा का इतना प्यार देख राजवीर से उनसे कहता है — “ आई मिस यूं पापा। ” और फिर से उनके गले जा लगा।
“ आई मिस यूं टू मेरा बच्चा। ” कहते हुए अशोक जी ने उसकी पीठ थपथपाई।
अभी अशोक जी और राजवीर नॉर्मल हुए ही थे कि तभी सुलोचना काकी वहां भागते हुए पहुंची।
“ साहब जी साहब जी। ”
सुलोचना काकी को इतना घबराया देख राजवीर परेशान हो गया।
“ क्या हुआ सुलोचना ? ” अशोक जी ने सवाल किया।
“ साहब जी वो.…छोटे बाबा। ” कहते हुए वो हांफ रही थी।
“ क्या हुआ उसे सुलोचना? ” अशोक जी ने झट से पूछा और ऊपर उसके कमरे की तरफ़ बढ़ गए।
तो एक दूसरे सर्वेंट ने कहा, “ साहब जी छोटे बाबा ने खुद को कमरे में लॉक कर लिया है। बहुत कोशिश कर ली। पर वो दरवाज़ा नहीं खोल रहे। कुछ देर पहले सामान टूटने की भी आवाज़ आ रही थी लेकिन अब वो भी नहीं आ रही। ”उस सर्वेंट ने जल्दी जल्दी सब कुछ कह डाला जिसे सुनकर अब अशोक जी को और भी डर लगने लगा।
बस अशोक जी भागते हुए अंशु के कमरे की तरफ़ भागे। राजवीर भी उनके पीछे चला गया।
सुलोचना काकी और बाकी सभी सर्वेंट्स भी भागे।
अंशु उन सभी के लिए उनके बच्चे जैसा ही था। उनकी छोटी मैडम का बेटा था जो सबको प्यारा था।
सभी को वो अपनी शरारत से परेशान ज़रूर करता था लेकिन फिर भी वो सबका दुलारा था।
अंशु के कमरे के बाहर…
“ अंशु दरवाज़ा खोलो बेटा। अपने नानू बड्डी को माफ़ कर दो। दरवाज़ा खोलो। ”
लेकिन किसी ने कोई या यूं कह लो अंशु ने कोई जवाब नहीं दिया।
अब अशोक जी का दिल घबराने लगा।
वो सुलोचना को बोलते हैं,
“ सुलोचना रामदीन से कहो जल्दी से मास्टर की 🗝️ लेकर आए। ”
“ अंशु…
सॉरी बच्चा नानू को आप पर गुस्सा नहीं करना चाहिए था। दरवाज़ा खोलो बच्चा। अंशु। ”
“ शांत हो जाइए पापा अनुराग बिल्कुल ठीक होगा। ” राजवीर अशोक जी को संभालते हुए कहा तो अशोक जी ने न में सर हिलाया।
अशोक जी राजवीर से बोले, “ नहीं सोनू तुम नहीं जानते उसे। जिद में बिल्कुल अपनी मां पर गया है। और किसी को भी मेरे करीब बर्दाश्त नहीं कर पाता। ” कहते हुए उन्होंने अपने सर पर हाथ रख लिया।
अब तो राजवीर भी परेशान होने लगा।
उसने अपने मन में कहा, “ बिल्कुल अपने जैसा बना दिया है तुमने अपने बेटे को। एक बार मिलो तुम फिर दोनों मां बेटे की क्लास न लगाई तो कहना।
पहले तुम पापा को परेशान करती थी। अब अपने बेटे को भी अपने जैसा बना डाला। हद्द है। ”
कुछ ही देर में…
रामदीन मास्टर की 🗝️ लेकर आया। तो अशोक जी उससे चाभी छीनते हुए दरवाज़ा खोलते हैं।
और अंदर जा कर देखते हैं तो —
पूरा रूम तहस नहस हुआ पड़ा था।
सब कुछ बिखरा और टूटा हुआ फर्श पे बिखरा हुआ था।
तभी वहां किसी के सिसकने की आवाज़ आई।
अशोक जी ने पलट कर देखा तो ये आवाज़ टेंट हाउस से आ रही थी।
वो वहां गए और घुटनों पर बैठ अंदर देखें तो पाया कि
अंशु अपने एक सॉफ्ट टॉय को गले लगाए सिसक रहा था।
“ आपने तो अपने नानू बड्डी की जान ही निकाल दी।”
वो अपना हाथ बढ़ा कर अंशु के आंसू पोछते हैं और कहते हैं। और उसे अपनी गोद में लेकर लाड करने लगे। वो भी उनसे चिपक कर रोने लगा।
अशोक जी उसकी इस मासूमियत पर मुस्कुरा दिए।
वो खुद से अपने मन में बोले, “ रोना तुम्हे चाहिए अशोक ठाकुर लेकिन रो तो ये रहा है। पहले बेटी परेशान करती थी अब बेटी का बेटा । भगवान जाने पोता पोती कैसे होंगे। ”
राजवीर बस उन दोनों को ही देख रहा था।
“ क्या हुआ बड्डी? नाराज़ हो गए। ”
तो अनुराग ने झट से हां में सर हिलाते हुए उनकी गोद में सिमटते हुए बोला, “ नानू बड्डी आप मेरे नानू बड्डी हो। मैं आपको शेयल (शेयर) नहीं कलूंगा। ” और कहते हुए रोने लगा।
उसकी इस मासूमियत अशोक जी ने उसके माथे को चूमते हुए कहा, “ हां , हम बस आपके नानू बड्डी है बच्चा। ”
रामदीन , सुलोचना काकी और सभी सर्वेंट्स उन्हें देख मुस्कुराते हुए देख रहे थे।
फिर उसे वैसे ही अपनी गोद में लेकर कमरे से बाहर आए और रामदीन से बोले, “ रामदीन छोटे बाबा का रूम साफ करवाओ। और सबकुछ पहले जैसा होना चाहिए। ”
आदेश देते हुए वो रामदीन से बोले तो रामदीन ने जवाब में कहा, “ बिल्कुल साहब जी अभी हो जाएगा। ”
राजवीर ये सब देख मुस्कुराया और न में अपना सर हिलाया।
और वो सभी नीचे चले गए।
पहले उन्होंने अंशु के चेहरे को साफ़ किया और फिर अपने हाथों से खाना खिलाया। फिर खुद उसे अपने कमरे में सुला भी दिए।
अनुराग के सोने के बाद अशोक जी कमरे से बाहर हॉल में आए।
हॉल इस वक्त राजवीर रामदीन से कुछ बातें कर रहा था।
अशोक जी वहां आते हुए बोले, “ रामदीन… ”
“ साहब जी आप फ़िक्र न करें। ”
तो अशोक जी चिंतित हो जाते हैं और कहते हैं।
“ नहीं रामदीन। कैसे फिक्र न करें? आज चंद मिनटों के मेरा ध्यान अंशु से सोनू पे क्या हट गया , हमारे बच्चे की ये हालत हो गई। इसकी वजह तो हमें जाननी है।
हम नहीं चाहते कि बड़ों की उलझन में वो मासूम अपनी मासूमियत खो दे। आज उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया आगे न जाने क्या हो जाए।
इसलिए जितनी जल्दी हो ये सब ख़त्म करो। और हम कुछ भी नहीं जानते। ”
उनकी इस बात पर रामदीन ने सहमति जताई। वहीं राजवीर कन्फ्यूज्ड होकर उन दोनों को देख रहा था।
राजवीर बोला, “ आपके कहने का मतलब क्या है पापा? ” राजवीर ने सवाल किया।
तो अशोक जी गंभीर होते हुए कहते हैं —
“ सोनू अंशु ऐसा बच्चा नहीं है जो बिना कारण कुछ भी करे । आपने कमरे की हालत देखी थी न। ”
तो राजवीर ने हां में सर हिलाया।
तब अशोक जी राजवीर को बताते हैं।
“ अंशु ऐसा तभी करता है जब वह बहुत परेशान होता है या उसे किसी बात का डर लगे। लेकिन कभी खुद को बंद नहीं करता। पर आज उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
तुम सोच भी नहीं सकते उस समय क्या महसूस कर रहे हैं हम। ऐसा लग रहा था जैसे दरवाज़ा तोड़ कर अपने बच्चे को सीने से लगा ले। ”
कहते हुए उनका गला भर आया। इससे राजवीर समझ गया कि उसके पापा अनुराग से किस हद तक अटैच हो चुके हैं।
तब भी उसे उसका जवाब नहीं मिला था।
इसलिए उसने पूछा, “ लेकिन मेरे आने से उसे क्या डर होगा पापा? और पापा मैं तो पहली बार उससे मिला हूं। ”
उसके सवाल पर अशोक जी खामोश हो गए। कुछ पल उसे देखते रहने के बाद वो बोले, “ वो आपसे नहीं सोनू। आपके बच्चों के आने से डरा हुआ है। ” अशोक जी का जवाब सुनकर राजवीर हैरान हो गया।
“ मतलब … ”
“ छोटे साहब हम बताते हैं। ” रामदीन ने कहा।
तो राजवीर अशोक जी और रामदीन को कन्फ्यूजन से देख रहा था और उनके बोलने का इंतज़ार करने लगा।
तब रामदीन ने अपने फोन से एक ऑडियो प्ले किया।
रिकॉर्डिंग में दो लोगों की आवाज़ सुनाई दी उन्हें जो कि लड़की की थी—
“ अरे सुना है छोटे साहब को जुड़वां बच्चे हुए हैं और वो आने भी वाले हैं। अब तो साहब जी का पूरा समय उन दोनों को ही मिलेगा। ” पहली लड़की ने कहा।
“हां वैसे भी छोटे बाबा को छोटी मैडम अब अपने साथ लेकर चली जाएगी। क्योंकि न तो छोटे साहब उनके साथ रह सकते हैं और न ही उनकी पत्नी।” दूसरी ने जवाब दिया।
तभी एक आदमी की भी आवाज़ आई।
“ अरे सुना है छोटे साहब अपनी बीवी की हर बात मानते हैं। उन्हें तो छोटी मैडम बिल्कुल भी नहीं भाती। याद नहीं कैसे पिछली बार छोटे साहब ने अपनी पत्नी के लिए छोटी मैडम से लड़ाई की और घर छोड़कर चले गए। ”
“ हां। और बड़े साहब को भी छोटी मैडम ने कसम दे कर उन्हें रोकने से मना कर दिया था। ” पहली वाली ने कहा।
तो दूसरी वाली बोली, “ लेकिन मुझे नहीं लगता अब उनकी या उनके बेटे (अंशु) का यहां कुछ अब होने वाला है। ”
“ और नहीं तो क्या। अगर देखा जाए तो छोटे साहब के बच्चे ही साहब जी के असली वारिस हैं। अब कौन दादा चाहेगा कि उनके पोते पोती उनकी बेटी के कारण घर से चले जाए। ” उस आदमी ने कहा।
तो दूसरी लड़की बोली, “ सच कहूं तो मुझे छोटी मैडम बिल्कुल भी पसंद नहीं। हर समय बस अपना हुकुम चलाती रहती है हम पर। उनकी वजह से घर की बहु बेटे घर छोड़ कर चले गए। खुद भी अपने मायके में रहती है।
पता नहीं कैसी औरत है ये। जो अपना ससुराल छोड़ यहां मायके में है। और तो और अपने बेटे को भी बड़े साहब के भरोसे छोड़ जाती है। उन्हें तो खुद के बेटे की भी नहीं पड़ी। जाने कैसी मां है? ” कहते हुए उस लड़की की आवाज़ में एक अजीब सी बेरुखी थी।
“ छोड़ न। वैसे भी बहु जी आएंगी। तो अपने आप दोनों मां बेटे को इस बार यहां से निकाल देंगी। ”
और रिकॉर्डिंग यहीं ख़त्म हो गई।
“ ये सब क्या है काका? ” राजवीर ने सवाल किया।
इस वक्त राजवीर बिल्कुल भावहीन नज़रों से उन्हें देख रहा था और अपने जवाब का इंतज़ार कर रहा था।
“ यही वजह थी छोटे साहब जो छोटे बाबा ऐसी प्रतिक्रिया दे दिए। ये सब छोटे बाबा को जानबुझ कर सुनाया गया था दो दिन पहले। तब से वो परेशान थे। ”
“ पर वो मासूम किसी से कुछ कह न सका रामदीन। और आज देखो उसने कैसे अपना गुस्सा निकाला। ” अशोक जी निराशा में बोले।
“ मतलब? ” अब ये राजवीर का सवाल था या जवाब ये तो वही जाने।
तब रामदीन ने उससे कहा, “ मतलब ये छोटे साहब कि कोई नहीं चाहता कि आप यहां वापस लौटे। क्योंकि आपके लौटने से आपके और छोटी मैडम और साहब जी में सुलह हो । ये कोई नहीं चाहता।
और आपको यहां से और छोटी मैडम और साहब जी से दूर रखने के लिए छोटे बाबा को जानबुझ कर ये सब सुनाया गया। ताकि आपतीनों की गलतफहमी दूर न हो। ”
तभी अशोक जी बोले, “ रामदीन ये बात उस तक न पहुंचे। ”
“ माफ़ करना साहब जी लेकिन अगर मैं गलत नहीं तो अब तक छोटी मैडम सब कुछ जान चुकी होगी। और अगर मेरा अंदाज़ा सही है तो वो आज शाम को यहां होंगी।” रामदीन ने सर झुका कर कहा।
ये सुनकर तो अशोक जी ने अपने सर पर हाथ रख लिया।
उनके ऐसे रिएक्शन को देख राजवीर हंसने लगा।
“ क्या पापा आप अब भी इतना डरते हैं उससे? ” राजवीर ने माहौल को हल्का करने के लिए अशोक जी को चिढ़ाया।
“ सोनू आप नहीं जानते इन बीते सालों में वो कितनी खतरनाक हो गई हैं। संजू भी उन्हें संभाल नहीं पाते। ”
कहते हुए अशोक जी बेबसी से उन्हें देखने लगे।
तो रामदीन और राजवीर दोनों ही हंसने लगे। उन दोनों को खुद पर हंसते देख अशोक जी का। तो मुंह बन जाता है।
तभी अशोक जी को कुछ याद आता है।
वो राजवीर को घूरते हुए बोले, “ क्या आप अकेले आए हैं? ”
“ नहीं तो क्या? ”
इससे आगे अशोक जी कुछ कहते उससे पहले ही राजवीर ने रामदीन को कुछ इशारा किया और कहता है —
“ अच्छा ये सब छोड़िए मैं अभी आपको आपके पोते और पोती से मिलवाता हूं। ” कहते हुए राजवीर वहां से भागने को हुए ही थे कि अशोक जी ने उसका हाथ पकड़ लिया।।
जहां ये सुनकर उनकी आंखों में एक चमक आ गई। वहीं उनकी आंखों में कुछ उलझन भी थी।
“ सच ! आप बहु बच्चों के साथ आए हैं? ” अशोक जी ने सवाल किया या जवाब ये उन्हें ही समझ नहीं आया।
तो राजवीर ने हां में सर हिलाया और कहा, “ जी पापा। सब आएं है। ”
फिर अपन हाथ उनसे छुड़ा कर कहता है —
“ आप यहीं रुकिए मैं अभी उन्हें लेकर आया। ” और राजवीर अपने कमरे की तरफ़ बढ़ गया।
राजवीर का रूम…
जब राजवीर रूम में आया तो देखा कि रेहाना और बच्चे बेड पर सो रहे थे।
एक तरफ़ रेहाना सोई हुई थी बीच में बच्चे और बेड की दूसरी तरफ तकिए लगे थे।
राजवीर मुस्कुराते हुए उनके पास गया। उसने रेहाना के सर को सहलाते हुए उसके माथे को चूम लिया।
और धीरे से कहा, “ लव यू। ”
फिर अपने दोनों बच्चों को गोद में लेकर नीचे हॉल में आया।
उसके जाते ही रेहाना ने आंखें खोली।
और दरवाज़े को देखते हुए खुद से बोली, “ आई लव यू टू वीर। ” और कुछ सोचते हुए वापस अपनी आंखें बंद कर सो गई।
हॉल में…
राजवीर जैसे ही बच्चों को लिए आया तो उन्हें देख अशोक जी की आंखों में नमी बढ़ने लगी। उन्हें सब धुंधला दिखने लगा।
तो रामदीन ने उनके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “ जाइए साहब जी। ”
अशोक जी ने बिना किसी की नज़रों में आए अपने आंसुओं को साफ किया और राजवीर के सर पर हाथ रखते हुए बोले, “ हमेशा खुश रहें आप। ”
फिर दोनों बच्चों के माथे को चूम लेते हैं। उन दोनों बच्चों के सर से नोटों की गड्डी घुमाते हैं। और उसे रामदीन को देते हुए बोले, “ इससे सब में बांट देना रामदीन। और जल्दी से इनके लिए पालने मंगवाओ। ”
“ और सुलोचना आज रात दावत होनी चाहिए। भई आज घर में लक्ष्मी आई है। ”
फिर राजवीर को देखते हुए आगे कहते हैं
“ आज आपकी मां और मासी मां दोनों बहुत खुश होंगे। ”
कहते हुए अशोक जी की आंखों में चमक और होठों पर जमी मुस्कुराहट देख राजवीर जैसे सुकून से भर गया।
वो बच्चों को देखते हुए उनसे बोला, “ पापा गोद में नहीं लेंगे इन्हें। ”
तो अशोक जी थोड़े भावुक हो गए। वो सोफे पे बैठ गए तो राजवीर ने दोनों बच्चों को उनके गोद में दे दिया।
अशोक जी आंखों में नमी लिए एक सुकून भरी मुस्कान के साथ दोनों को देखने लगे।
कुछ देर उन्हें देखते रहने के बाद अशोक जी ने राजवीर को देखते हुए बोले, “ बहु कहां है? ”
तब राजवीर उन्हें बताते हुए कहा, “ वो सो रही पापा। डॉक्टर ने उसे जितना हो आराम करने को कहा है। वैसे भी उसकी प्रेग्नेंसी में कॉम्प्लिकेशन थे फिर भी माता रानी की कृपा से उसकी नॉर्मल डिलीवरी हुई है।
आगे कोई प्रॉब्लम न हो इसलिए पहले डॉक्टर से तीनों का चेक अप करवाए तो उन्होंने उसे जितना हो रेस्ट करने को कहा है। ”
“ कोई बात नहीं। (फिर बच्चों को देखते हुए आगे बोले)
आप दोनों की मम्मा से हम बाद में मिलेंगे। पहले आप दोनों अपने दादू से मिल लो। हम आपके दादू हैं अशोक ठाकुर। ”
ऐसे ही बच्चों के साथ समय उनका कट जाता है। और शाम हो जाती है।
अनुराग जब सो कर उठा तो खुदको अकेला पता है। वो जल्दी से उठा और बाहर आया।
हॉल में…
अशोक जी राजवीर और रेहाना के साथ चाय पी रहे थे।
वो जल्दी से अशोक जी के पास आया और उनकी गोद में बैठ खुद को उनके सीने में छुपा लिया।
अचानक हुई इस हलचल से अशोक जी चौंक गए। लेकिन अपने अंशु को महसूस कर वो उसे बाहों में भरते हुए कहते हैं।
“ अरे वाह आज तो बड्डी कितनी देर तक सोया है। लगता रात की नींद भी अभी ही पूरी कर ली। हम्मम! ”
लेकिन अनुराग ने कुछ भी नहीं कहा। और कसके अशोक जी को पकड़ लिया। जैसे उसे डर हो कि कोई उसके नानू बड्डी को उससे छीन न ले।
राजवीर उसे देख मुस्कुराने लगा।
अशोक जी उसकी घबराहट समझ रहे थे वो उसके सर को सहलाते हुए बोले, “ अंशु सब ठीक है। नानू बड्डी यहीं हैं आपके पास। ” और उसके सर पर किस करते हैं।
वहीं रेहाना अपनी गहरी नज़रों से अनुराग को देख रही थी। जाने वो क्या सोच रही थी।
“ अच्छा अंशु आइए आज आपको हम किसी से मिलवाते हैं। ” अशोक जी ने कहा।
लेकिन वो ऐसे ही बैठा रहा।
तो राजवीर बोला, “ पापा आपने इसे बताया नहीं आज इसके मम्मा और डैडी आ रहे हैं। ”
ये सुनकर अनुराग अशोक जी के सीने से सर निकाल कर देखता है तो सामने राजवीर और रेहाना बैठे हुए थे। और उनके सामने दो पालन भी था जिसमें दोनों बच्चे थे।
वो धीरे से अशोक जी के
हाथों की स्लीव को हिलते हुए पूछता है।
“ ये सब कौन है? ” अनुराग ने धीरे से कहा।
अशोक जी मुस्कुराते हुए अनुराग को अपने बगल में बैठते हुए बोले, “ आओ आपके नानू बड्डी आपको सबसे मिलवाते हैं। ”
To be continued…


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