
“ अच्छा अंशु आइए आज आपको हम किसी से मिलवाते हैं। ” अशोक जी ने कहा।
लेकिन वो ऐसे ही बैठा रहा।
तो राजवीर बोला, “ पापा आपने इसे बताया नहीं आज इसके मम्मा और डैडी आ रहे हैं। ”
ये सुनकर अनुराग अशोक जी के सीने से सर निकाल कर देखता है तो सामने राजवीर और रेहाना बैठे हुए थे। और उनके सामने दो पालन भी था जिसमें दोनों बच्चे थे।
वो धीरे से अशोक जी के हाथों की स्लीव को हिलते हुए पूछता है।
“ ये सब कौन है? ” अनुराग ने धीरे से कहा।
अशोक जी मुस्कुराते हुए अनुराग को अपने बगल में बैठते हुए बोले, “ आओ आपके नानू बड्डी आपको सबसे मिलवाते हैं। ”
अब आगे —
राजवीर मुस्कुराते हुए उन दोनों को देख रहा था।
अशोक जी अनुराग को पालने के पास ले आए और बोले, “ ये आपके छोटे भाई बहन है। ”
अनुराग कुछ कहता उसे पहले ही किसी के तेज़ झगड़ने की आवाज़ उन सभी को सुनाई दी।
वैसे तो आवाज़ साफ़ नहीं थी लेकिन यह किसकी हो सकती है ये समझ राजवीर जल्दी सोफे के पीछे कूदते हुए बोला, “ पापा संभाल लेने वरना झांसी की रानी आज मार डालेगी मुझे। ”
अशोक जी कुछ बोल पाते उससे पहले ही एक उड़ता हुआ बैग उनके पैर के पास आ गिरा।
“ तुम ज़ाहिल इंसान हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी यहां आने की।”
कहते हुए एक लेडी पिंक सलवार सूट पहने अंदर आती है उसके पीछे एक उसका ही हमउम्र आदमी एक ब्लैक बिजनेस शूट पहने भी कुछ बड़बड़ाते हुए आता दिखाई दिया।
अशोक जी उन दोनों को देखे और फिर सोफे के पीछे छुपे राजवीर को और न में अपनी गर्दन हिलाई।
ये थे सोनारिका ठाकुर यानि मिसेज कपूर और संजीव कपूर। अशोक जी के बेटी और दामाद । जो कि आपस में लड़ रहे थे।
वो सुलोचना काकी से बोले, “ सुलोचना जाओ कुछ ठंडे की व्यवस्था करो अभी बहुत ज़रूरत पड़ने वाली है। ”
तभी रेहाना बोली, “ पापा आप इन्हें कुछ समझाते क्यों नहीं। ”
“ इंसान समझते हैं रेहाना बहु। ये दोनों तो है ही जानवर। जब छोटे बच्चे थे तब भी नाक में दम कर देते थे और अब जब खुदके बच्चे हैं इनके तब भी नाक में दम कर रखा है। ”
फिर अशोक जी अनुराग को देखते हुए बोले, “ … बड्डी आज आप भी ये नौटंकी देखो। ”
अनुराग जो चुप चाप उनकी बातें सुन रहा था वह हां में सर हिलाया और चुप चाप अपने नानू बड्डी की गोद में बैठ सामने देखने लगा।
इधर ,
“ सोना शांत हो जाओ। इतना गुस्सा तुम्हारे लिए ठीक नहीं। ” संजीव ने अपनी पत्नी को शांत कराने और राजवीर को बचाने की मंशा से कहा तो मिसेज कपूर ने उन्हें घूरा।
“ खबरदार जो उस गधे के वकालत करी तो… ” कहते हुए सोनारिका ने अपनी बात अधूरी छोड़ कर एक वार्निंग लुक दिया।
उसके बाद बेचार चुप हो गए और कुछ न बोले।
तभी सोनारिका ने गुस्से में कहा, “ अबे ओ बिना सींग वाले घड़े बाहर निकल। क्योंकि अगर मैने निकाला ने तुझे खोज कर फिर देखना। ”
लेकिन राजवीर वैसे ही दुबक कर बैठा रहा। थोड़ी देर बाद तक जब राजवीर बाहर नहीं आया तो सोनारिका का गुस्सा उसके सर चढ़ गया।
“ ये आदमी ऐसे नहीं मानने वाला। ” कह कर उसने जयदेव को आवाज़ दी।
"जयदेव …"
"जी मैडम। "
सोनारिका गुस्से से बोली, “जयदेव अगले दस सेकंड में मुझे वो आदमी मेरे सामने होना चाहिए।
“ओके मैडम।”
जयदेव सोनारिका का पर्सनल बॉडीगार्ड था जो उसके सिवाए किसी की भी नहीं सुनता था।
वहीं जयदेव का नाम सुनते ही राजवीर ने खुद से कहा, “ ये जल्लाद आज भी इसके साथ ही घूमता है। ”
और फिर खुद ही सोफे से निकालत हुए आपने दांत दिखाते हुए बोला, “ अरे मेरी झांसी की रानी क्यों गुस्सा हो रही हो मैं तो आ ही रहा था। बस अपनी अंगूठी ढूंढ रहा था। ” कहते हुए वो सोफे के पीछे से खड़ा हुआ।
तो सोनारिका अपने दांत पिसते हुए बोली, “तुम्हें तो आज कोई नहीं बचाने वाला। ” कहते हुए अपने दुपट्टे को कमर से बांध और एक सर्वेंट जो पोछा लेकर जा रही थी उसके हाथ से वो लेकर राजवीर के पीछे दौड़ लगा दी।
राजवीर ने आव देखा न ताव और खुदको बचाने के लिए भागा।
और फिर शुरू हुई चूहे बिल्ली की दौड़।
वहीं राजवीर को ऐसे देख संजीव आराम से अपने ससुर जी बैठते हुए बोले, “ वैसे पापा जो भी कहो आज तो मज़ेदार एंटरटेनमेंट होने वाला है। ”
“सो तो है। ” अशोक जी बोले, और फिर दोनों हंसने लगे।
वहीं रेहाना ने जब संजीव की बातें सुनी तो बोली, “ जीजू आप को उसे समझाना चाहिए और आप हैं कि यूं हंस रहे हैं। ”
“ भाभी आपको लगता है कोई उन्हें समझा सकता है। और वैसे भी पूरे रास्ते मैंने वही कोशिश करी है लेकिन आख़िर में उसने मुझे ही धमकी दे दी। वैसे कांग्रेचुलेशन ट्विंस के लिए। ”
रेहाना कुछ कहती उससे पहले ही सभी को कुछ टूटने की आवाज़ आई।
सामने देखा तो सोनारिका एक हाथ में पोछा लिए राजवीर को मारने की कोशिश कर रही थी वहीं राजवीर खुद को बचाने के लिए एक आधा टूटा हुआ वास पकड़े खुद को बचा रहा था। क्योंकि बाकि आधा तो टूट कर फर्श पर बिखरा पड़ा था।
रेहाना आंखें फाड़ कर उन दोनों को देख रही थी। अनुराग भी क्यूरियोसिटी ने उन दानों को देखने लगा।
लेकिन कुछ कहा नहीं बच्चे ने।
“ अरे झांसी की रानी शांत हो जाओ। ” राजवीर ने खुदको उस टूट वास से बचाते हुए कहा।
इस पर सोनारिका बोली, “ शांत हो जाऊं हां शांत। आज तुम्हें मैंने शांत न किया तो कहना तुम? तुम खुदको समझते क्या हो? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी? ”
“अरे मेरी मां माफ़ी मांग तो रहा हूं। माफ़ कर दे। आगे से ऐसा नहीं होगा। ” राजवीर ने हाथ जोड़ते हुए बोली तो सोनारिका ने उसे घूर कर देखा।
वो गुस्से से बोली, “ माफ़ी गई भाड़ में। पहले तो तुम्हें मारूंगी। और क्या कहा आगे से ऐसा नहीं होगा। साले आगे से तुम ऐसा सोचने से भी डरोगे। इतना मारूंगी। ”
उन दोनों को ऐसे कुत्ते बिल्ली की तरफ़ लड़ते देख अशोक जी ने एक आह भरी।
वो बेबसी से बोले, “ हे भगवान आज जाने कितने वास ये दोनों शहीद करने वाले हैं। ”
“ पापा ये तो अब रोज़ होगा। ” कहते हुए संजीव हंसने लगा तो अशोक जी मुस्कुराए और उन दोनों को देखने लगे।
अपनी आंखों की नमी छुपाते हुए मन में बोले, “ अब कैसे समझाए आपको संजीव इन दोनों की ये लड़ाई देखने के लिए आंखें तरस गई थीं।
इन्हें अपनी आंखों के सामने ऐसे देखने के लिए तो ये अशोक ठाकुर सबकुछ कुर्बान कर दे। ”
तभी अनुराग ने उन सभी को देखते हुए कहा, “ मम्मा उन्हें क्यों पीट रही हैं। ”
“ बेटा आपकी मम्मा आज पकड़म पकड़ाई खेल रही है। तुम यहां आओ अपने पापा के पास। उन्हें छोड़ो। कितने दिन हो गए पापा ने अपने अनुराग को ठीक से देखा भी नहीं है। ” और लग गए बाप बेटे एक दूसरे में।
वहीं रेहाना अशोक जी से बोली, “ पापा रोकिए इन दोनों को। वरना चोट लग जाएगी। ” रेहाना की चिंता देख अशोक जी मुस्कुराए।
वो बोले, “ रहने भी दो रेहाना बहु। ये जब तक अपनी भड़ास निकाल नहीं लेते रुकने वाले नहीं। ”
उसके बाद वो राजवीर के दोनों बच्चों के साथ खेलने लगे।
वहीं रेहाना चिंता से राजवीर को देखने लगी जो इधर से उधर भागते हुए खुद को बचाने में लगा हुआ था। और भागते भागते गर्दन तक आ पहुंचे।
तब रेहाना उनके पीछे चली गई।
करीब एक घंटे बाद…
जब दोनों पूरी तरह थक गए तो वहीं घांस पर एक दूरी बना कर दोनों लेट गए।
“ बस अब मैं और नहीं भाग सकती। ” कहते हुए सोनारिका बुरी तरह हाफ रही थी। और वहीं लेट गई।
राजवीर भी लेटते हुए कहा, “ मैं तो कब से कह रहा था शांत हो जाओ शांत हो जाओ। पर तुम सुनती कहां हो। ”
“तुमने सुनी थी मेरी बात?” सोनारिका के सवाल पर राजवीर खामोश रहा।
जब सोनारिका को उससे कोई जवाब नहीं मिला तो वो उठ कर बैठ गई और खोए हुए कहती है —
“ नहीं! तुमने नहीं सुनी । किसीने नहीं सुनी। मैं तुम्हें आवाज़ लगती रही पर तुमने मुड़कर भी नहीं देखा। ”
( इतना कहकर वो कुछ पल ख़ामोश हो गई। उसकी आवाज़ में बहुत दर्द था जिसे राजवीर अपनी बंद आंखों से भी अच्छे से महसूस कर पा रहा था। )
वो आगे उसी उदासी से बोली, “… पता है राज उस दिन जो दर्द मुझे तुम्हारे मुंह मोड़कर जाने से हुआ था वो आज भी दिल के किसी कोने में बहुत चुभता है।
और जब भी तुम्हारी बहुत याद आती है तब वो दर्द मुझे सांस नहीं लेने देता है।
ऐसा लगता है जैसे खुद से खुद की जान… ”
इससे पहले कि वो अपनी बात पूरी कर पाती राजवीर ने उसे पीछे से गले लगा लिया और उसके कंधे में अपना सर छुपा लिया।
और बहुत धीरे से कहा, “ प्लीज नो! ” उसकी आवाज़ में एक कंपकपाहट थी ।
एक दर्द जो उसने हमेशा सबसे छुपाए रखा था।
सोनारिका को अपने कंधे पर थोड़ा गिला और थोड़ा गर्म सा महसूस हुआ।
वो अपने उंगलियों से राजवीर के बालों को सहलाते हुए सामने शून्य में देखते हुए बोली, “ आंसू मत बहाओं राज। मेरा वादा टूट जाएगा। ”
“ तो तुम ऐसी बातें मत करो न आना । ” राजवीर रुआंसी आवाज़ में धीरे से बोला।
“ जानते हो जब मेरा एक्सीडें हुआ था और अनुराग पैदा हुआ था तब न संजीव मेरे साथ थे और न तुम। पापा भी आउट ऑफ स्टेशन थे। मुझसे नाराज़ थे वो। इसलिए बात भी नहीं कर रहे थे।
एक्सीडेंट में बहुत चोट आई मुझे। बहुत दर्द हो रहा था। डर भी लग रहा था कि कहीं मेरे बच्चे को न कुछ हो जाए।
और वो लोग जो मेरा पीछा कर रहे थे उन्हें मेरी हालत पर तरस नहीं आया। वो उनमें से एक ने एक ज़ोर की लात मारी थी मेरे पेट पर। वो चोट इतनी जोर का था कि लगा जैसे जान निकलने वाली है।
लेकिन फिर तुम्हारी , संजीव की और पापा की याद आई। तुम सबका चेहरा आंखों के सामने घूमने लगा। बहुत हिम्मत कर मैंने खुद को संभाला और उन लोगों से पीछा छुड़ाया।
और आख़िर में सड़क पर बेजान बेहोश हो कर गिर गई। लेकिन बेहोश होने से पहले मैने किसी तरह तुम्हें कॉल किया। मुझे लगा कि चाहे जो भी हो कम से कम इस वक्त ज़रूर तुम मेरी मदद करोगे।
लेकिन मैं गलत थी। गलत थी मैं राज। तुमने मुझे उस दिन गलत साबित कर दिया। क्यों किया तुमने ऐसा ?
इसका जवाब नहीं मांगूंगी। पर अब शायद कभी… ”
राजवीर ने उसपर अपनी पकड़ कसते हुए थोड़ा आगे झुक उसकी आंखों में देखते हुए उसके मुंह पर हाथ रख धीरे से बोला,
“ नो आना आगे जो भी कहने वाली हो मत कहो। जानता हूं बहुत बड़ी गलती हुई मुझसे उस दिन।
जिसके लिए मैं आज तक खुद को माफ़ नहीं कर पाया। और सच कहूं तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी तुम्हारा सामना करने की।
अगर उस दिन तुम दोनों को कुछ हो जाता तो शायद तुम्हारा राज जीते जी मर जाता। ”
कहते हुए वो सोनारिका के सामने आया और उसके चेहरे को हाथों में लेकर बोला, “ आई एम सॉरी आना! माफ़ कर दो। ”
सोनारिका उसकी आंखों में नमी लिए देखती रही। अचानक वो उसके गले लग कर रोने लगी।
राजवीर ने भी उसे कसके गले लगाया और अपनी आंखें बंद कर ली।
वहीं दूर खड़ी रेहाना उन दोनों को देखती रही। उसके चेहरे के भाव कुछ अच्छे नहीं थे।
उसने अपनी मुट्ठियां भी कसी हुईं थी।
कुछ देर तक दोनों को देखते रहने के बाद वो वहां से चली गई।
छह महीने बाद…
ठाकुर विला में
रेहाना हॉल में अपनी बेजान आंखों से फर्श को देख रही थी। उसकी हालत बहुत ख़राब थी।
सामने सुलोचना काकी का बेजान शरीर सफ़ेद चादर में लिपटा हुआ था।
तभी एक पुलिस ऑफिसर बोला, “ मिस्टर सिंह (राजवीर) ये कुछ सामान हैं जो शायद हो सकता है कि…”
वो आगे अपनी बात पूरी कर पता उससे पहले ही राजवीर वो सामान लेकर अपने सीने से लगा लेता है।
कुछ देर बाद पुलिस वहां से चली गई।
तभी एक सर्वेंट राजवीर के पास भागते हुए आई और बोली, “ छोटे साहब जल्दी चलिए छोटी मैडम किसी के काबू में नहीं आ रही। कहीं वो खुद को कुछ… ”
इससे आगे वो कुछ कहती राजवीर ऊपर सोनारिका के कमर की तरफ भागा।
सोनारिका के कमरे में…
जब राजवीर कमरे में पहुंचा तो वो बदहवास सी अनुराग को ढूंढ रही थी।
संजू ( संजीव कपूर ) कहां हैं आप? संजू अनुराग कहां हो दोनों? पापा?
ऐसे ही तीनों को आवाज़ देते हुए पूरे कमरे को तहस नहस कर चुकी थी।
राजवीर उसकी हालत देखी नहीं गई।
वो जल्दी से उसके पास आया और उसे झटके से अपने करीब करते हुए बोला, “ होश में आओ आना। वो नहीं हैं यहां। ”
तो सोनारिका ने चारों तरफ कमरे में देखते हुए कहा —
“ नहीं राज वो तीनों यहीं हैं। पापा ने कहा था न कि वो उन दोनों को लेकर आ रहे हैं मेरे पास।
और देखो अब तीनों के तीनों चुपकर मुझे परेशान कर रहे हैं।
मैं अभी इन्हें ढूंढ लूंगी…
हां तुम देखो…
मैं अभी ढूंढ लूंगी उन्हें। ”
और वो फिर से उन्हें आवाज़ देने लगी।
“ अनुराग बेटा मम्मा के पास आओ।
पापा संजू बस बहुत हो गया अब सामने आ जाइए। ”
कहते हैं सोनारिका राजवीर से खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।
पर राजवीर ने उसे आज़ाद नहीं किया और कस के उसे अपने गले लगा लिया।
तभी किसी ने आ कर सोनारिका को राजवीर से दूर अपनी तरफ़ घिंचा और एक जोर का थप्पड़ उसके गाल पर दे मारा।
ये रेहाना थी।
रेहाना सोनारिका को देख उससे झकझोरते हुए गुस्से से चीखते हुए बोली, “ बस बंद करो अपना ये नाटक। और दूर रहो मेरे पति से। ”
राजवीर जिसकी सख़्त नज़र रेहाना पर थी। वो उसकी नज़र को अनदेखा कर सोनारिका से कहती है।
“ तुम एक खूनी हो सोनारिका। पहले मेरे बच्चों को मुझसे छीन लिया फिर अपने पति और बेटे और तो पापा को भी नहीं छोड़ा। इन सबकी मौत की वजह सिर्फ़ तुम हो तुम। समझी। ”
उसने इतना कहा ही था कि तभी राजवीर ने सोनारिका को उससे अगल किया और रेहाना को सोनारिका से दूर कर दिया।
“ बस रेहाना! अब एक लब्ज़ नहीं। ”
ये शायद पहली बार था कि राजवीर ने उसका नाम लिया था। वो हैरानी से उसे देखने लगी।
और धीरे से बोली, “ रेहाना? ”
“ हां रेहाना । क्योंकि तुम मेरी राही नहीं हो। तुम तो वो जिसकी वजह से आज मेरा परिवार बिखर गया। ”
सोनारिका रेहाना की बातें सुनकर सोनारिका एक दम शांत हो गई।
राजवीर सोनारिका की तरफ़ इशारा करते हुए रेहाना से बोला, “ दिखाई दे रही है इसकी हालत । मेरी आना जिसने कभी मुझ संभाला था। जिसने कभी हार नहीं मानी।
जो मेरी हिम्मत की हमेशा से इकलौती वज़ह रही। वो आज तुम्हारी वज़ह से सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी वज़ह से ऐसे बिखरी हुई है। ”
“ ये आप क्या कह रहे हैं वीर? ये सब इसकी वजह से हुआ। और तो और हमारे बच्चे भी इसकी के कारण आज हमारे साथ नहीं है। ”
कहते हुए रेहाना गुस्से से सोनारिका को देखते हुए बोली तो राजवीर ज़ोर से चीखा ।
“ रेहाना! ”
आज राजवीर ने शायद पहली बार रेहाना पर हाथ उठाया था। लेकिन उसके हाथ उसके गालों को छू पता उससे पहले ही जयदेव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
तो राजवीर ने जयदेव को गुस्से में देखा।
“ पेपर तैयार हो गए? ” कहते हुए राजवीर की नज़रे रेहाना पर टिकी हुई थी।
जो कि अविश्वास से उसे देख रही थी।
तब जयदेव ने कहा, “ जी सर। ”
अभी वो आगे कुछ कहता उसे पहले ही कुछ गिरने की आवाज़ आई।
राजवीर ने मुड़ कर देखा तो सोनारिका बेहोश जमीन पर गिरी हुई थी।
“ आना , आना आंखें खोलो। आना। ” उसके गालों को थपथपाते हुए राजवीर उसे उठाने की कोशिश करने लगा।
लेकिन उसने आंखें नहीं खोली।
तो राजवीर ने सोनारिका को अपनी गोद में उठाया और जयदेव से कहा, “ जयदेव जल्दी से डॉक्टर सुब्रमण्यम को कॉल करो। ”
कहते हुए उसे गोद में लिए दूसरे कमरे में आ गया।
थोड़ी देर में डॉक्टर सुब्रमण्यम आई जो कि एक पचास साल की महिला थी।
उन्होंने ने सोनारिका का चेक अप किया और फिर इंजेक्शन दिया। और अपने साथ आई नर्स को उसके ब्लड लेने को कहा।
और खुद कमरे से बाहर आई।
राजवीर उन्हें देख कर सवाल किया, “ आंटी आना कैसी है? वो ठीक तो है न? ”
तो डॉक्टर सुब्रमण्यम बोली, “ राजवीर मैं तुमसे कोई झूठ नहीं बोलूंगी। लेकिन सोना की हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
मुझे डर है कहीं ऐसी हालत में वो डिप्रेशन में न चली जाए। जो कि उसके लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होग दोनों के लिए।”
“ आपके कहने का मतलब क्या है आंटी? ” राजवीर ने सवाल किया।
जयदेव उसके पीछे खड़ा था।
तो डॉक्टर सुब्रमण्यम ने गंभीरता से कहा, “ राजवीर सोना इस प्रेग्नेंट। और मुझे लगता है शायद वो टू मंथ्स प्रेग्नेंट है। और उसकी जो कंडीशन है इस वक्त मुझे डर है कहीं?”
ये सुनकर राजवीर हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो हंसे या रोए।
वो घबराते हुए फिर से पूछा, “कहीं क्या आंटी? साफ़ साफ़ कहिए बात क्या है? ”
“ राजवीर उसकी ऐसी हालत में अगर उसका ध्यान नहीं रखा गया तो आई एम सॉरी टू से न तो हम बच्चे को बचा पाएंगे और न ही उसे। ” डॉक्टर सुब्रमण्यम ने उसे बताया।
ये सुनकर राजवीर के कदम लड़खड़ा गए। तो जयदेव ने उसे सहारा दिया।
उसने कसके के अपनी आंखें बंद कर ली। और एक कतरा आंसू का उसकी आंखों से बेघर हो गया।
तब डॉक्टर सुब्रमण्यम ने उसे समझते हुए कहा, “ खुद को संभालो राजवीर । इस वक्त अगर तुम कमज़ोर पड़ गए तो हम सोना को हमेशा हमेशा के लिए शायद खो देंगे। ” कहते हुए उनका गला भर आया।
तो राजवीर ने अपने आंसू पोछे और खुद को संभालते हुए कहा, “ नहीं आंटी ऐसा कुछ भी नहीं होगा। मैं न तो मेरी आना को कुछ होने दूंगा और न ही उसके बच्चे को। ”
ये कहते हुए राजवीर खुदको आज कितना बेबस महसूस कर रहा था ये सिर्फ़ वही जानता था।
उसकी ऐसी हालत देख डॉक्टर सुब्रमण्यम की आंखें भर आई। उन्होंने खुद को संभाला।
फिर राजवीर को देखते हुए बोली, “ ठीक है तुम उसका ध्यान रखो। अब मैं चलती हूं।
बाकी जब उसके रिपोर्ट्स आ जाएंगे तो ही मैं आगे कुछ कहूंगी। लेकिन अभी के लिए ये समझलो उसे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है। ”
फिर डॉक्टर सुब्रमण्यम राजवीर की पीठ थपथपाई और अपने साथ आई नर्स के साथ वहां से चली गई।
वहीं थोड़ी दूर खड़ी रेहाना ने सब सुन लिया था।
वो अपनी आंखों में नफ़रत लिए बोली, “तुमने मुझसे मेरा सबकुछ छिन लिया। मुझे नफ़रत है तुमसे सोनारिका। नफ़रत है तुमसे।” और फिर वहां से चली गई।
To be continued…


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