
राजवीर ने अपना पेन उठाया और उस फाइल के पन्नों पर पहले साइन किया और फिर उसे रेहाना के सामने रख दिया।
“ मिसेज रेहाना राजवीर सिंह मैं चाहता हूं कि आप इस पर साइन कर खुद को और मुझे इस घुटन आज़ाद कर दें। ”
रेहाना ने कुछ भी नहीं कहा। उसकी नज़र तो बस उन पेपर्स पर टिकी हुई थी।
वो बस एक टक उन पेपर्स को ही देख रही थी।
अब आगे…
वो धीरे सेे एक शब्द कहती है बस।
“ डाइवोर्स ?! ”
तो राजवीर ने भी वो शब्द सुने लेकिन कुछ भी नहीं कहा बस उसे देखता रहा।
कुछ पल बाद…
वो राजवीर को देखते हुए बेचैनी से बोली, “ ये सब क्या मज़ाक है वीर। ”
“ मज़ाक नहीं है। सच है। ” ये कहते हुए आज एक अजीब सी शांति थी राजवीर के चेहरे पर।
जो रेहाना के डर को बढ़ाने का काम कर रही थी।
वो जल्दी से बोली, “ वीर आप… आप सच में चाहते हैं कि हमारा तलाक हो। आख़िर आप क्यों… क्यों मुझे तलाक देना चाहते हैं? मुझसे ऐसी भी क्या गलती हो गई। ”
“ इसकी वजह मैं तुम्हें बताना नहीं चाहता। बस इतना चाहता हूं कि तुम ये पेपर्स साइन कर दो बिना किसी बहस के। ”
इस बार राजवीर ने सख़्ती से कहा तो रेहाना को अब गुस्सा आने लगा।
उसने थोड़े गुस्से में राजवीर की आंखों में आंखें डाल कर कहा, “ और आपको ऐसा क्यों लगता है कि मैं ऐसा कुछ करूंगी? बीवी हूं आपकी और सोफा सेट नहीं जो पसंद नहीं आया तो रिटर्न कर देंगे। शादी हुई है हमारी वीर और शादी मज़ाक नहीं होती। ”
कहते हुए वो उसके करीब आ गई।
तो राजवीर उससे दो कदम पीछे होते हुए उसी तरह उसकी आंखों में आंखें डाल देखने लगा
“ बिल्कुल शादी कोई मज़ाक नहीं होता। इसलिए मैं खुदको और तुम्हें इस मज़ाक से आज़ाद कर रहा हूं। ” कहते हुए राजवीर ने उसकी तरफ़ पीठ कर ली।
ये पहली बार था जब बात करते हुए राजवीर ने उसे पीठ दिखाई थी। और इसने रेहाना पर उसके डर को भी हावी कर दिया।
वो राजवीर के सामने आ कर उसके हाथों को पकड़ती है।
वो कहती है —
“ मैं आपको कोई डाइवोर्स नहीं दूंगी वीर। मुझे कोई आज़ादी नहीं चाहिए। सुन रहे हैं आप।
नहीं चाहिए कोई आज़ादी। ”
लेकिन न तो राजवीर ने उसे देखा और न कोई जवाब दिया।
“ वीर प्लीज मत कीजिए ऐसा। मत कीजिए ऐसा। मर जाऊंगी आपके बिना। बहुत प्यार करती हूं आपसे मैं वीर। ”
कहते हुए वो घुटनों के बल बैठ गई और रोने लगी।
राजवीर बिना उसे देखे सामने देखते हुए रेहाना से बोला, “ ये मेरा आख़िरी फैसला मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना। घुटन हो रही है मुझे इस रिश्ते में। आज़ादी चाहिए मुझे । ”
बार बार उसकी वही घुटन वाली बात सुनकर अब रेहाना पर उसका गुस्सा भी बुरी तरह हावी हो गया।
वो डर और गुस्से से सवाल करती है —
“ आपको मेरे साथ घुटन हो रही है। क्या मैं वजह जान सकती हूं? क्यों हो रही है आपको यह घुटन? ”
राजवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
रेहाना की आंखें इस वक्त भरी हुई थीं वो कभी भी रो सकती थी। लेकिन राजवीर उसे देख तक नहीं रहा था। वो हैरान थी अपने सामने खड़े इंसान को देख कर।
वो इंसान जिसने कभी उसकी आंखों में नमी नहीं पड़ने दी। आज वही उसे रुला रहा था। वो इंसान जिसकी आंखें उसके अलावा किसी को देखती नहीं थी आज वो उसकी तरफ़ नजरें भी नहीं उठा रहा था।
राजवीर की ये हरक़त रेहाना का दिल तोड़ देती है। उसके दिल में इस वक्त बहुत दर्द हो रहा था।
लेकिन फिर भी वो खुदको संभाल राजवीर के सामने खड़े होकर अपने सवाल का खुद जवाब देते हुए कहती है —
“ जानती थी कोई जवाब नहीं होगा आपके पास। लेकिन मेरे पास है। आप मुझे सोनारिका की वज़ह से तलाक देना चाहते हैं, है न? ”
उसके ये कहने भर से राजवीर ने अपनी लाल आंखों से उसे घूरा। लेकिन रेहाना नहीं रुकी और आगे कहती रही —
“ …उस औरत की वज़ह से पहले मेरे बच्चों ने मेरा साथ छोड़ दिया ।
और अब …
अब वो आपको भी मुझसे छीनना चाहती है। लेकिन ये मैं किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगी। सुना आपने वीर ।
नहीं होने दूंगी मैं ऐसा कुछ भी।
आप मेरे हैं और मेरे ही रहेंगे। उसका कोई हक़ नहीं आप पर। आप मेरे हैं सिर्फ़ और सिर्फ़ रेहाना राजवीर सिंह के। सुना आपने ? ”
ये सब सुनकर राजवीर को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन उसने खुद पर कंट्रोल किया । वो इस समय बस अपनी आना के बारे में सोच रहा था। उसे इस समय किसी की भी नहीं पड़ी थी। किसी की भी नहीं।
इसलिए वो फिर से रेहाना को पेपर्स साइन करने का बोलता है।
पर वो मना कर देती है। तो राजवीर अब गुस्से में कहता है—
“ रेहाना मैं आख़िरी बार पूछ रहा हूं क्या तुम इन पेपर्स पर साइन करोगी या नहीं? ”
राजवीर कहते हुए उससे गुस्से में घूरता है तो रेहाना भी अब ताव में आ गई।
“ नहीं … नहीं… नहीं करूंगी।
कभी नहीं करूंगी।
जो करना है कर लीजिए वीर। मैं आपको उसके पास नहीं जाने दूंगी। साइन मैं कभी नहीं किसी कीमत पर नहीं करूंगी। ”
उसके इस जवाब से राजवीर के सब्र ने अब जवाब दे दिया। उसने जयदेव को पुकारा।
“ जयदेव … ”
“ सर। ”
कहते हुए उसने एक और फाइल निकाली और राजवीर को दिया।
जयदेव और वो वकील भी वहीं चुप चाप सब कुछ देख और सुन रहे थे। राजवीर ने न उन्हें जाने को कहा और रेहाना को तो जैसे उनका ध्यान ही नहीं था कि उनके अलावा उस स्टडी रूम में कोई और भी है।
तलाक के नाम से ही वो बौखलाई हुई थी।
वहीं राजवीर ने वो फाइल रेहाना के सामने रखते हुए कहा, “ एक बार इसे देख लो। शायद तुम्हारा मन बदल जाए। ”
वो फाइल रेहाना की तरफ़ करते हुए राजवीर की आंखों में कुछ ऐसा था जिसे देख रेहाना को लगा वो बर्बाद हो गई।
पता नहीं क्यों लेकिन उस फाइल को देखते हुए उसे कुछ गलत होने का एहसास हो रहा था उसे।
लेकिन फिर भी हिम्मत कर, अपनी घबराहट चेहरे पर आने नहीं देती। और उस फाइल को खोल कर देखने लगी।
जैसे जैसे उसने वो फाइल देखी और पढ़ी उसकी आंखें हैरानी से बड़ी होती चली गई।
“ क्या हुआ रेहाना मेहरा अब क्या कहना चाहेंगी आप? ”
अपना ये नाम सुनकर रेहाना को अब रियलाइज हुआ कि शायद अब सब उसके हाथ से सब निकल चुका है। पर वो फिर भी एक आख़िर कोशिश करने का सोचती है।
रेहाना घबराते हुए जल्दी से बोली, “ वीर देखिए जैसा दिख रहा है वैसा कुछ भी नहीं है। प्लीज़ मुझे समझाने का एक मौका दीजिए। ”
“ मौका हम्मम…
मौका? ”
कहते हुए राजवीर उस पे गुराया। तो रेहाना सकपका गई। वो दो कदम पीछे हट राजवीर को देखते रह गई। राजवीर का ये रूप उसने पहले कभी भी देखा था।
“ क्या तुम्हें मैंने मौके नहीं दिए? हम्म बोलो? क्या तुम्हें मैंने मौका नहीं दिया? ” कहते हुए राजवीर ने रेहाना के दोनों बाजू पर अपनी पड़क कस दी।
“ आह… वीर… ”
रेहाना दर्द में उसका नाम ली।
राजवीर उसपर चीखता है।
“ खबरदार…
खबरदार जो मुझे इस नाम से बुलाया तो। तुम्हारे जैसे धोखेबाज और फ़रेबी लड़की को मैं अब एक पल और बर्दाश्त नहीं कर सकता। ”
राजवीर ने रेहाना को खुद से दूर झटकते हुए कहा तो रेहाना उससे कुछ बोल न सकी।
कुछ पल उसे देखते रहने के बाद वो फिर से कोशिश करते हुए बोली, “ आप एक बार मेरी बात सुनिए तो… ”
तो रजवीर उस पर चिल्ला कर बोला, “ नहीं ! अब एक और झूठ मैं नहीं बर्दाश्त कर पाऊंगा। एक बार को तुम्हारा मेरी जिंदगी में शामिल होने की वजह नजरअंदाज कर दूं।
लेकिन जो तुमने मेरे परिवार के साथ मेरी आना के साथ किया है न वो बिल्कुल भी नहीं बर्दाश्त नहीं कर सकता । ”
सोनारिका का ज़िक्र सुनकर ही रेहाना का गुस्सा उसके सर चढ़ गया।
वो गुस्से में घूरते हुए राजवीर से बोली, “ ओह अब समझी मैं। आपने पहले से ही मन बना लिया की आप मुझे डाइवोर्स देंगे ही। ये मत समझना राजवीर सिंह की मैं नहीं जानती कि आज कल कहां आपकी रातें और दिन गुज़र रहे हैं। ” कहते हुए वो राजवीर को धक्का तक दे देती है।
लेकिन राजवीर संभल कर उसे अपनी हैरान नज़रों से देखता रह गया।
जिस औरत के लिए उसने अपने परिवार को छोड़ा आज वो ही उस पर इतना घटिया इल्ज़ाम लगा रही थी।
वहीं रेहाना के मुंह से सोनारिका के लिए गलत सुनकर जयदेव की आंखें गुस्से से लाल होने लगी। जिस पर उसके बगल में खड़े वकील साहब की नज़र पड़ गई।
वो अपने आप में बोला, “ लो इस औरत ने शैतान को जागने का काम भी कर दिया। अभी तक तो सिर्फ राजवीर सर गुस्से में थे लेकिन अब ये डायनासोर भी गुस्से में आ गया। जाने क्या होगा? भगवान बचा लेना अपने इस बच्चे को। यहां से जा भी नहीं सकता। तो सब आपके ऊपर ही है। ”
अपने मन में भगवान को याद करते हुए वो वकील राजवीर और रेहाना को देखने लगा।
“ तुम होश में भी हो क्या बोले जा रही हो। ” राजवीर गुस्से में बोला।
तो रेहाना एक तंज भरी हसी हंसते हुए कहती है —
“ अब तक नहीं थी! लेकिन अब होश में आ गई हूं। आपको क्या लगता है मैं नहीं जानती कि आपके और सोनारिका के बीच क्या चल रहा है?
अरे वो तो है ही बेगैरत।
लेकिन आप…
आप बेवफाई करेंगे ये उम्मीद नहीं थी मुझे।
खुदका पति नहीं रहा तो दूसरे के पति पर… ”
“ मिस मेहरा… ”। “ रेहाना … ”
जयदेव और राजवीर दोनों एक साथ चिल्लाए। वहीं वकील साहब ने अपनी आंखें कस कर बंद कर ली।
To be continued…


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