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सच्चाई!?

“ मिस मेहरा… ”। “ रेहाना … ”

जयदेव और राजवीर दोनों एक साथ चिल्लाए। वहीं वकील साहब ने अपनी आंखें कस कर बंद कर ली।

अब आगे…

इससे आगे वो कुछ और कह पाती कि वहां राजवीर ने वहां रखी कांच की टेबल पर एक लात मारी। और वो वहीं चूर हो गया।

“ अब एक और शब्द नहीं। ” राजवीर अपनी पूरी ताकत से चीखते हुए कहा तो रेहाना डर से सहम गई। और कुछ कदम पीछे हट गई।

वहीं जयदेव के भी सब्र ने जवाब दे दिया।

वो भी गुस्से में रेहाना से बोला, “ मिस मेहरा अगर आप राजवीर सर की वाइफ नहीं होती तो मैं आपको बताता आपके शब्दों का अंजाम क्या होता? ”

“ धमकी दे रहे हो मुझे? तुम हो कौन ? एक दो कौड़ी के नौकर हो तुम। इससे ज़्यादा क्या हैसियत नहीं तुम्हारी । ”

जयदेव की धमकी पर रेहाना उस पर बिफरते हुए बोली तो राजवीर उस पर रेहाना को वार्निंग देते हुए कहा —

“ जबान संभाल कर रेहाना कहीं तुम्हें अपने ही कहे शब्दों पर पछतावा न हो। ”

“ अरे जाइए जाइए मिस्टर राजवीर सिंह। मैं नहीं डरती आपसे और आपकी खोखली धमकियों से। और एक बात ये तलाक तो होने से रहा। उस औरत और उसके उस बच्चे के पास तो मैं आपको जाने नहीं देने वाली। ”

रेहाना भी उस पर उसी ताव में बोली क्योंकि वो समझ चुकी थी डाइवोर्स तो होकर ही रहेगा चाहें ऐसे या वैसे।

इसलिए उसने अपने गार्ड डाउन कर लिए लेकिन वो किसी भी कीमत पर राजवीर को सोनारिका के पास नहीं जाने देगी। ये भी तय कर लिया उसने।

अब भी उसके तरकश में एक तीर ऐसा था जिससे वो फिलहाल के लिए इस तलाक को कुछ समय के लिए टाल सकती थी। 

वहीं उसकी ऐसी बातें सुनकर राजवीर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा।।

“ हाहाहाहाहाआ… ”

तो रेहाना उसे असमंजस में देखती रही। 

“ तुम रोकेगी मुझे? औकात है इतनी तुम्हारी? ”

कहते हुए राजवीर वकील को देखता एक नज़र और फ़िर रेहाना की आंखों में आंखें डालकर बोला —

“ वकील साहब जरा मैडम को उन सभी सबूत के दर्शन तो करवाइए। आख़िर इन्हें भी तो पता चले आखिर धोखा किसे कहते हैं। धमकी किसे कहते हैं। ”

इसके बाद वकील साहब एक वीडियो चला दिया।

उस वीडियो को देखने के बाद उसके चेहरे पर पसीने की बूंद चमकने लगी।

उसके माथे पर पसीना और डर की लकीरों को देखते हुए बोला —

“ क्या हुआ? ”

“ यकीन नहीं हुआ? ”

लेकिन रेहाना बस ख़ामोश रही बस उसकी नज़र उस वीडियो को देखती रही। 

राजवीर फिर बोला,  “ क्यों? 

 और चाहिए अपनी बेवफाई के सबूत? तुम शायद भूल गई रेहाना की मैं कौन हूं?

और ऐसे और भी कई सबूत हैं मेरे पास जो तुम्हें सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है। ”

उसके इस बात पर रेहाना अविश्वास से उसे देखने लगी कैसे वो उसे जेल भेजने की बात इतनी आसानी से कर दी। 

“ मैं चाहता था कि ये तलाक आराम से बिना किसी झंझट के हो जाए लेकिन तुम्हे हर जगह अपनी चलानी होती है न? ”

राजवीर ने सर्द लहज़े में कहा और उसे घूरने लगा। 

“ ये झूठ है। आप ये क्या बकवास किए जा रहे हैं। अपनी गलती छुपाने के लिए मुझपर इल्ज़ाम लगा रहे हैं। ”

रेहाना खुद को बचाने की सोचते हुए अपने दिमाग को दौड़ाने लगी। और राजवीर पर ही इल्ज़ाम लगी थी। 

राजवीर उसे देख अपने मन में बोला,  “ यकीन नहीं होता इस औरत के साथ मैंने पांच साल गुजार दिए। ” लेकिन अब उसने रेहाना को कुछ भी नहीं कहा। 

उसने जयदेव को देखता है —

“ जयदेव जो कहा है उसकी तैयारी करो। और वकील साहब आप अपने काम पर लगिए। ”

“ ओक सर… ” बोलकर दोनों स्टडी रूम से बाहर चले गए।

अब वहां सिर्फ़ राजवीर और रेहाना थे।

दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे। 

अब राजवीर बड़े आराम से उसे देखते हुए वो पहली फाइल उठाई और बिना उसकी तरफ़ देखे बोला—

“ हां! तो क्या कहा तुमने मैं तुम पर इल्ज़ाम लगा रहा हूं। ओक। 

तो चलो आज तुम्हें तुम्हारे कारनामे गिनवाते हैं। ”

तो रेहाना कुछ बोलने को हुई ही थी कि राजवीर बीच में टोकते हुए कहता है— 

“ न न एक शब्द मत बोलना। वरना जिस शांति से बात कर रहा हूं न उससे दुगनी तेज़ी से तुम्हारे पूरे मेहरा परिवार को बर्बाद कर दूंगा। ”

अब रेहाना चुप हो गई। 

राजवीर ने बोलना शुरू किया —

“ सबसे पहले तुमने मुझे धोखे से हासिल किया। मुझे यकीन दिलाया कि तुम मेरी राही हो जोकि तुम नहीं हो।

फिर शादी के कुछ महीनों बाद ही मुझे मेरे परिवार मेरे पापा से अलग कर दिया।

क्या कहा था तुमने मेरे पापा से की राजवीर अगर मेरे साथ आएंगे तो इस घर से सारे रिश्ते तोड़ कर। ”

रेहाना उसकी उसकी बातें सुनकर बहुत बुरी तरह डर गई। क्योंकि ये बात सिर्फ़ उसके और अशोक जी के बीच में थी तो राजवीर को कैसे पता चला। 

“ …मुझे मेरी आना से अलग करने के लिए तुमने उस पर झूठे इल्ज़ाम लगा दिए।

पांच साल… (अपनी पांचों उंगली दिखाते हुए —)

पूरे पांच साल मैं तड़पा अपने पापा के लिए लेकिन कभी तुमने मुझे सच नहीं बताया। प्यार करती थी न मुझसे तो तुम्हें मेरी तड़प कैसे नहीं दिखी। 

तुमने मेरी धमकियों को खोखला कहा न लेकिन तुम्हारा तो सबकुछ कुछ खोखला निकला। प्यार भी?

और सालों बाद जब मैं फाइनली लौटा तो भी तुमसे मेरी खुशी बर्दाश्त नहीं हुई।

कितनी चालें चली तुमने। और उसका हर्जाना भुगत किसने ? ”

कहते हुए वो चीख पड़ा। 

“ हां किसने भुगता? मेरी आना और मैंने।

रेहाना इतना सब सुनने के बाद भी वो अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी।

“ ये सब पट्टी सोनारिका ने पढ़ाई आपको । वो आपको मेरे ख़िलाफ़ करना चाहती हैं। आप सम… ”

तब राजवीर ने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा —

“ चुप बिल्कुल चुप। तुम्हे क्या लगता है मैं सच नहीं जानता । हवा में बातें कर रहा हूं। तो ये तुम्हारी। तुम्हारे हर एक सच से वाकिफ हूं मैं।

सभी सबूत हैं मेरे पास। फिर चाहे वो अनुराग की किडनैपिंग हो या आना कि गाड़ी के ब्रेक फैल करना। पापा को धोखे से हॉस्पिटल भेजना या अपने आशिक के साथ मिलकर मेरे ही बच्चों को मोहरा बना कर मुझे… ” कहते कहते वो चुप हो गया। 

उसने फिर उसकी तरफ़ पीठ कर वहां दीवार पर अपनी और अपने फैमिली फोटो को देखते हुए कहा — 

( उस तस्वीर में चार लोग थे। अशोक ठाकुर और मिसेज अशोक ठाकुर। और उन दोनों के दोनों तरफ़ राजवीर और सोनारिका खड़े थे। )

“ जानती हो जब मासी मां मुझे और आना को छोड़ कर गई। तभी आना के कहने पर पूरे घर में या यूं कहे कि इस घर के हर एक कोने में कैमरा लगवाए जिसके बारे में मेरे, उसके और जयदेव के अलावा कोई भी नहीं जानता ।

और तुम्हारी हर एक हरक़त का सबूत है मेरे पास। वो जिसकी गिनती अभी हुई और वो भी जिसके बारे अभी तक मैंने बोला नहीं। ”

ये सुनकर रेहाना के पैरों तले जमीन घिसक गई।

“ नो नो। ये झूठ बोल रहे हैं। ये नहीं हो सकता। ” रेहाना अपने मन में कहती है। 

राजवीर चुप चाप रेहाना के कुछ बोलने का इंतज़ार कर रहा था लेकिन जब उसे कोई जवाब नहीं मिला तो वो कहता है —

“ क्या सोच रही हो ? यही न कि मैं झूठ बोल रहा हूं। इतने सालों में तुम ये तो जान ही गई होगी रेहाना की मैं कभी झूठ नहीं बोलता। ” 

फिर रेहाना की तरफ़ मुड़ते हुए बोला —

“ चलो तुम्हें तुम्हारी करतूत दिखाता हूं। ”

कहते हुए उसने रेहाना का बाजू पकड़ा और उसे अपने साथ बुक शेल्फ के पास लेकर आया।

वहां उसने एक ब्लैक कवर वाली एक पुरानी बुक हटाया तो एक छोटा सा रेड बटन खेस कुछ था । उसने उसे दबाया।

एक्चुअली में वो स्विच था।

उसके वहां एक छोटा सा फिंगर प्रिंट सेंसर था। राजवीर वहां अपनी हथेली रखी स्कैन होते ही वो बुकशेल्फ दरवाज़े की तरह बीच से खुल गया।

वहां एक और दरवाज़ा था जिसे राजवीर ने अपने अंगूठे को स्कैन कर खोला।।

फिर रेहाना को घिंचते हुए अंदर लेकर गया।

वो कोई कमरा नहीं पूरा एक मिनी हॉल जैसा बना हुआ था। वहां दो रूम भी थे। और हर जरूरत की चीज़। और सामने ढेर सारे मॉनिटर्स जिस पर पूरे विला के हर एक कोने की लिव फुटेज चल रही थी।

ये देख रेहाना को यकीन हो चला कि अब उसका कुछ भी नहीं हो सकता।

पहले ही वो इन सबसे हैरान परेशान हो चुकी थी। वो डर चुकी थी। और अब ये सब अपने सामने देख उसे सांस भी लेने में मुश्किल होने लगी। 

के तभी एक बड़ी सी led स्क्रीन ऑन हुई और उसपे कुछ फुटेज चलने लगे। 

जिसे उसकी तो पूरी दुनियां ही खत्म हो गई। वो बेसुध सी ज़मीन पर बैठ गई। 

राजवीर उसे बस अपनी खाली आंखों से देखता रहा। 

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Wannye Rose

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